महिंद्रा ग्रुप में नौकरी देने के नाम पर ठगी - जरूर पढ़ें

By Abhishek Dubey

नई दिल्ली क्राइम ब्रांच एक ऐसे गैंग की तलाश में है जिसने न जाने कितने ही नवयुवकों को महिंद्रा ग्रुप में नौकरी देने के नाम पर ठगी की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और इस गैंग के कई ठिकानों की पहचान भी। अनुमान है कि आनेवाले कुछ दिनों में हमें इस केस में गिरफ्तारियां भी देखने को मिलेगी।

महिंद्रा ग्रुप में नौकरी देने के नाम पर ठगी - जरूर पढ़ें

बता दें कि ये FIR खुद महिंद्रा ग्रुप की तरफ से किया है। ज्वाइंट सीपी आलोक कुमार के मुताबिक एक इनवेस्टिगेटिव टीम बना दी गई है और हफ्ते भर के भीतर इस केस में कुछ प्रोग्रेस देखने को मिलेगा। पुलिस के मुताबिक कुछ ठिकानों का पता चला है जहां से ये गैंग ऑपरेट करते थे। इनमें डीडीए मार्केट जहांगिरपूरी और शक्ति विहार, बदरपुर शामिल हैं।

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महिंद्रा में नौकरी देने के नाम पर ठगी का ये मामला तब सामने आया जब अरूण चिखाले नाम के व्यक्ति ने अपने जॉब ऑफर को (जो कि उसे उस गैंग द्वारा मिला था) वेरिफाइ करवाने के लिए महिंद्रा कंपनी से संपर्क किया। महिंद्रा ने इसकी जांच की तो पता चला की ये एक फ्रॉड है और किसी ऑर्गनाइज रैकेट द्वारा संचालित किया जा रहा।

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महिंद्रा के वाइस प्रेसिडेंट ए विश्वनाथ द्वारा पुलिस में दिए कंप्लेन के मुताबिक कुछ लोग फर्जी फर्म चला रहे हैं। ये लोग नौकरी के लिए लोगों को अपनी वेबसाइट पर रजिस्टर करने को कहते हैं और रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन फीस के नाम पर उनसे पैसे वसूलते हैं। इसी बीच किसी कैंडीडेट को उस फर्म पर शंका हुआ और उसने सीधे महिंद्रा कंपनी से संपर्क किया। इसपर कंपनी ने जांच कि तो पता चला कि ये फर्जी है लोगों को गलत तरीके से ठगा जा रहा है।

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विश्वनाथ ने आगे बताया कि ये रैकेट चलाने वाले लोग विभिन्न जॉब पोर्टल से लोगों की जानकारी लेते थे और उन्हें कॉल कर महिंद्रा ग्रूप में नौकरी का झूठा भरोसा देते थे। इंटरव्यू के लिए पंद्रह से बीस हजार रुपए और बाकी के पैसे जिसमें वो 20 से 80 हजार रुपए तक की मांग करते थे, बाद में देने को कहते थे। ये सारा पैसा मोबाइल वॉलेट या ऑनलाइन ट्रांसफर द्वारा लिया जाता था।

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लोगों को धोखा देने के लिए ये धोखेबाज महिंद्रा कंपनी के लेटरहेड की सॉफ्ट कॉपी का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कई फर्जी ई-मेल आईडी बना रखी थी, जिससे लोग भ्रमित होते थे। साथ ही उन्होंने अपने फोन नंबरों को ट्रूकॉलर में महिंद्रा के नाम से सेव किया था, जिससे लोग धोखा खा जाते थे। विश्वनाथ के मुताबिक ऐसे करीब बीस नंबर की जानकारी दिल्ली पुलिस को दे दी गई है।

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बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि नौकरी के नाम पर लोगों को धोखा देनेवाले किसी गिरोह का पर्दाफाश किया गया हो, ऐसे तमाम मामले रोज आते रहते हैं। बड़े शहरों में तो ये धड़ल्ले से चल रहे थे लेकिन अब ये छोटे शहरों में भी अपने पांव पसार रहे है।

यदि स्थानिय पुलिस और स्टेट या शहर की साइबर पुलिस मिलकर ईमानदारी से काम करे तो ऐसे गिरोहों को बड़ी आसानी से पकड़ा जा सकता है, क्योंकि ये एकदम उनकी नाक के नीचे ही होता है। स्थानिय पुलिस प्रशासन को ये बात अक्सर पता होती है कि उनके क्षेत्र में किस तरह की गतिविधियां हो रही हैं।

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Article Published On: Thursday, June 28, 2018, 12:25 [IST]
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