#WeGo के संग कोलकाता की सैर का मजा - भाग 1
जब तक कोई चुनौती आपके सामने नहीं आती, तब तक आप खुद को बदलते नहीं और जब चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं तो उसमें मजा आने लगता है। ऐसा ही चैलेंज टीवीएस वीगो के साथ हमने स्वीकार किया। कोलकाता की सैर का। इस सैर में जो मजा था, वाकई बेहद रोमांचक और हर्षपूर्ण था।
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भारतीय शहरों स्कूटर से सैर कैसे की जाती है यह उससे पूछिए जो टू-व्हीलर चलाता है। खुली सड़क पर राइड का अपना ही मजा होता है, लेकिन जब अपने किसी अहम मकसद से निकलते हैं और ट्रैफिक में फंस जाते हैं, सकरी गलियों से गुजरना पड़ता है और शॉर्ट कट मारने होते हैं, तब असली दिक्कतें दिखाई पड़ती हैं। खैर ऐसी ही चुनौतियां कोलकाता की सड़कों व गलियों में आयेंगी। यह हमें अच्छी तरह पता था। इसी लिये हमने चुना टीवीएस वीगो स्कूटर। और कोलकाता ही नहीं, देश के कई शहरों की सड़कों को हम इसी स्कूटर से नापेंगे।

टीवीएस वीगो वह स्कूटर है, जो खास कर युवाओं और ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स के लिये बनी है। स्टाइलिश लुक, बेहतरीन रंग और स्कूटर की डिजाइन वाकई में दिल को छू लेने वाली है।

हम इसी वीगो पर सवार हो गये और चल पड़े कोलकाता के दुर्गा पूजा उत्सव को देखने के लिये। अक्टूबर का महीना कोलकाता घूमने के लिये सबसे अच्छा महीना होता है। इसी लिये हमने इस माह को चुना।

कोलकाता, कालीकोट, या कलकत्ता। चाहे कुछ भी कहिये यह पश्चिम बंगाल की राजधानी के अलग-अलग नाम हैं। कोलकाता शब्द बंगाली भाषा से निकला है। यह नाम निकला है इस स्थान के तीन प्राचीन गांवों में से एक के नाम से, जहां अंग्रेजों ने सबसे पहले कदम रखा था। कोलीकाता (बंगाली में: কলিকাতা)। और इसी इलाके में इस शहर को बसाया गया। बाकी तीन गांव हैं सुतानुती और गोविंदपुर। इस शहर को ईस्ट इंडिया कंपनी ने बसाया था। और 1911 तक यह ब्रिटिश साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। उसके बाद दिल्ली को राजधानी घोषित किया गया।

करीब से देखिये तो यहां भारतीय संस्कृति कूट-कूट कर भरी हुई है। इसे जुलूसों का शहर, महलों का शहर और उत्साह का शहर कहा जाता है। अब इस शहर में मेरे जैसा किंग कॉन्ग और राजकमल (एक दूसरी वीगो पर) सड़कों पर निकल पड़े।

राजकमल ने पहले थोड़ा व्यायाम किया और फिर यंग मेन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन (वाईएमसीए) की कैंटीन में नाश्ता किया।

वाइएमसीए की इमारत का निर्माण 1857 में हुआ था, जिसे भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लिये जाना जाता है। कहा जाता है कि यह एशिया में वाईएमसीए की सबसे प्राचीन इमारत है। खास बात यह है कि आज भी इस इमारत में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है। यहां की तमाम इमारतों पर 100 साल से ज्यादा पुरानी तिथियां पड़ी हैं। इसी से यहां की ऐतिहासिक भव्यता का अंदाजा आप लगा सकते हैं।

कुछ प्रोफाइल पिक्स खींचने के बाद हमने इलेक्ट्रिक स्टार्ट टीवीएस वीगो का स्टार्ट बटन दबा दिया। मौसम ठंडा था, हल्की-हल्की फुहारें पड़ रही थीं। लेकिन फिर भी हमारा उत्साह ठंडा नहीं पड़ा।

20 मिनट की राइड के बाद हमने गूगल मैप को चेक करना बंद कर दिया। हमें समझ आ गया। यहां के स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना ज्यादा बेहतर है। हमारी योजना कोलकाता की प्रमुख जगहों और दुर्गा पूजा पंडालों में जाना था। हमारे एक स्थानीय दोस्त ने हमें निम्न जगहें बतायीं-
दक्षिण कोलकाता
(1) एकदालिया एवरग्रीन- गरियाहाट
(2) सिंघी पार्क- गरियाहाट
(3) बलीगंगे कल्चरल एसोसिएशन- लेक रोड
(4) मैडॉक्स स्क्वॉयर रिची रोड
(5) सुरुचि संघा - अलीपोर
(6) चेटला अग्रगामी - चेटला
(7) देशापरिया पार्क - राशबिहारी एवेन्यू
(8) बेहाला नोटून डोल - बेहाला
(9) सृष्टि - बेहाला
(10) शाहजात्री - बेहाला
मध्य कोलकाता
(1) मोहम्मद अली पार्क - सेंट्रल एवेन्यू
(2) कॉलेज स्क्वॉयर - कॉलेज स्ट्रीट
(3) लेबुटोला पार्क - संतोष मित्रा स्क्वॉयर
(4) पार्क सर्कस मैदान - पार्क सर्कस 7 प्वाइंट क्रॉसिंग
(5) चलताबागान - माणिकटाला लोहापट्टी
उत्तर कोलकाता
(1) कुमारतुली पार्क - कुमारतुली
(2) काशी बोस लेन - काशी बोस लेन
(3) आदिबाशी बृंदा - लेक टाउन
(4) श्रीभूमि - लेक टाउन
(5) तरुण संघ - दम दम पार्क
(6) बाग बाजार सरबाजोनिन -बाग बाजार पार्क
पूर्वी कोलकाता
(1) एफडी ब्लॉक - सॉल्ट लेक

यहां मैं कहना चाहूंगा कि इसी भीड़-भाड़ वाले शहर में अगर आपके पास स्मार्ट फोन भी है, तो भी आप स्मार्ट नहीं हैं। हमारे पास ऑनलाइन मैप होने के बावजूद हम भटक गये। दिन भर 3जी डाटा का इस्तेमाल करते-करते फोन की बैटरी डाउन होने लगी थीं। ओर हां कनेक्टिविटी की समस्या भी बार-बार आयी। तभी राजकमल ने मुझे बताया कि वीगो में मोबाइल चार्ज करने की सुविधा भी है। बस यही मौका था अपने हाल ही में खरीदे गये 4जी सिमकार्ड के असली प्रयोग का। चार्जिंग प्वाइंट से कनेक्ट करते ही हमारे दिमाग का आधा बोझ यूं ही काफिर हो गया।

#WeGoKolkata की चुनौती चुनौती बेहद कठिन थी। नया शहर, नई सड़कें, वन-वे रूट और पूरी तरह कंफ्यूज करने वाला गूगल मैप। हम ही जानते हैं कि कैसे हमने आधा दिन बिताया। जब सब कुछ ठीक हो गया, तब हमने पंडालों की ओर रुख किया। टीवीएस वीगो के 110 सीसी इंजन ने हमारा हर पल साथ दिया। हमें एक पल भी थकान महसूस नहीं हुई।

कुछ जगहों पर जाने के बाद हमें समझ आ गया कि सभी पंडालों में जाना हमारे लिये मुमकिन नहीं है। क्योंकि लोगों से भरी सड़कों के बीच रेंगती हुई पीली टैक्सियां हर पल बाधाएं बन रही थीं।

लोगों में उत्साह दिखाई दे रहा था। चारों तरह ढोल सुनायी दे रहे थे। जो ऊर्जा इस शहर में दिखी, वो शायद मैंने पहले कहीं नहीं देखी। एक पंडाल से दूसरे पंडाल तक जाना बेहद कठिन था, लेकिन टीवीएस वीगो ने इसे आसान बनाया।

तमाम बेंगलुरुवासी (हमारा होमटाउन), मीटर से चलने वाली टैक्सी पर जाना पसंद करते हैं। भले ही वो कितनी महंगी क्यों न पड़े। वहीं #WeGoKolkata की इस चुनौती में हमने टैक्सी का खर्च उठाने से ज्यादा बेहतर वीगो को समझा। क्योंकि उत्तर कोलकाता के पंडालों की सैर में हम करीब 20 किलोमीटर चले। टैक्सी से चलते तो शायद 800 रुपए का खर्च आता, लेकिन वीगो पर हमने खर्च किये मात्र 25 रुपए।

तो वीगो पर कोलकाता की सैर का पहला दिन कुछ इस तरह रहा। हमने शहर के त्योहार का जमकर लुत्फ उठाया, पंडालों की सैर की, ढेर सारी तस्वीरें खींचीं। कुछ तस्वीरें आप यहां देख सकते हैं।

#WeGo के साथ हमले ली कुछ बच्चों की तस्वीरें जो शांतिपूर्वक प्रार्थना कर रहे थे।

#WeGo के साथ हम सिंघी पार्क पंडाल पहुंचे और शामिल हुए उन लोगों की भीड़ में, जिनमें मोबाइल से तस्वीरें लेने की होड़ मची हुई थी।

#WeGo के साथ हम बेलीगंगे में एकडलिया पंडाल पहुंचे और मां दुर्गा की बेहद खूबसूरत मूर्ति की तस्वीर खींचने का अवसर हमें प्राप्त हुआ।

हमारे पस अब भी बहुत कुछ कहने को है, क्योंकि #WeGo के साथ हमने मां दुर्गा के कई पंडालों की तस्वीरें खींचीं।

बने रहिये हमारे साथ इस उत्साह भरी सैर का दूसरा भाग पढ़ने के लिये। क्योंकि #WeGo के संग हम जा रहे हैं कोलकाता की नाइट लाइफ देखने।


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