ईंधन का सस्ता विकल्प होगा ग्रीन हाइड्रोजन, इतनी होगी कीमत
देश में वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में इथेनॉल प्लांट का उद्घाटन किया।
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सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए नीतियों की घोषणा कर चुकी है जिसके तहत भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ाकर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और पेट्रोल के आयात को कम करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भारत में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संबद्ध उद्योगों के सिविल इंजीनियरों और पेशेवरों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, गडकरी ने हरित ईंधन के बारे में कहा कि उनका सपना भारत में कम से कम 1 डॉलर (79 रुपये) प्रति किलोग्राम के हिसाब से हरित हाइड्रोजन उपलब्ध कराना है।

गडकरी ने कहा कि हाइड्रोजन का उत्पादन पेट्रोलियम, बायोमास, जैविक अपशिष्ट और सीवेज के पानी से किया जा सकता है और इसे एयरलाइंस, रेलवे और ऑटो उद्योग सहित कई क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन को एक डॉलर प्रति किलो के हिसाब से उपलब्ध कराना उनका सपना है।

गडकरी ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में इथेनॉल के उपयोग की भी सराहना की। उन्होंने खुलासा किया कि इथेनॉल की कीमत 62 रुपये प्रति लीटर है। उन्होंने आगे कहा कि इथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से कम होती है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) ने रूसी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इथेनॉल की कैलोरी वैल्यू को बढ़ाने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। गडकरी ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब नई तकनीक को प्रमाणित कर दिया है।

गडकरी ने 2024 के अंत से पहले भारतीय सड़क अवसंरचना को संयुक्त राज्य अमेरिका के बराबर बनाने के अपने लक्ष्यों का भी खुलासा किया। उन्होंने यह भी कहा कि देश में हरित वैकल्पिक सामग्री का उपयोग करने सहित बुनियादी ढांचे के विकास और प्रौद्योगिकी में जबरदस्त क्षमता है।

उन्होंने यह भी कहा कि हरित हाइड्रोजन को वैकल्पिक ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे गहरे कुएं के पानी से बनाया जा सकता है और 70 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा सकता है।

नितिन गडकरी इलेक्ट्रिक वाहन और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के खुले पैरोकार रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में यह भी दावा किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत अगले दो वर्षों में पेट्रोल से चलने वाली कारों के बराबर हो जाएगी। उन्होंने भारत में टोयोटा के हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV), मिराई (Mirai) पर एक पायलट अध्ययन भी शुरू किया है। हालांकि, इनमें से कितने दावे अमल में आते हैं, यह देखा जाना बाकी है।

गडकरी ने अपने एक पुराने बयान में कहा था कि पांच साल बाद देश में पेट्रोल की जरूरत खत्म हो जाएगी। भविष्य में बहुत जल्द कारें एथेनॉल, हाइड्रोजन, फ्लेक्स फ्यूल, सीएनजी या एलएनजी से चलेंगी। उन्होंने कहा था कि बायो-इथेनॉल से केवल पर्यावरण प्रदूषण मुक्त नहीं होगा बल्कि इससे किसानों को रोजगार मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।


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