पश्चिम बंगाल में अब लर्नर लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन बनेगा ऑनलाइन, इन सेवाओं के लिए नही जाना होगा आरटीओ
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में वाहन पंजीकरण और लर्नर लाइसेंस समेत कई तरह की सेवाओं को ऑनलाइन करने का फैसला किया है।
Recommended Video
पश्चिम बंगाल सरकार के परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती के अनुसार राज्य में वाहन का पंजीकरण करवाने और लर्नर लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को आरटीओ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई ऑनलाइन प्रक्रिया के एक महीने के भीतर शुरू कर दी जाएगी।

ऑनलाइन प्रक्रिया आम जनता के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी समान होगी। जानकारी के मुताबिक, वाहन रजिस्ट्रेशन, लर्नर लाइसेंस, वाहन परमिट, रोड टैक्स, हाइपोथिकेशन, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फैंसी नंबर से जुड़े सभी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है।

इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सार्वजनिक परिवहन को 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत सरकार सड़कों से डीजल बसों को हटाकर इलेक्ट्रिक बसें उतारेगी। इसके लिए आने वाले कुछ सालों में 1,180 इलेक्ट्रिक बसों को उतरा जाएगा।

परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आधारभूत संरचना को विकसित कर रही है। राज्य के कई महत्वपूर्ण शहरों और इलाकों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट बनाए जा रहे हैं। बता दें कि राज्य सरकार ने 1,180 ई-बसों को उतारने के लिए टाटा मोटर्स से साझेदारी की है। चक्रवर्ती ने बताया कि राज्य सरकार 1,000 इलेक्ट्रिक कैब को भी परमिट देने वाली है।

मौजूदा समय में पेट्रोल वाहनों पर 48 प्रतिशत के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी केवल 5 प्रतिशत है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिथियम की अधिक कीमत ने इलेक्ट्रिक वाहनों की लगत को बढ़ा दिया है लेकिन भविष्य में लिथियम के ज्यादा उत्पादन से कीमत में कमी आएगी। इसकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत में भी गिरावट देखने को मिलेगी।

वर्तमान में भारत की लिथियम बैटरी की 81 प्रतिशत आवश्यकता स्थानीय उत्पादकों द्वारा पूरी की जा रही है। वैकल्पिक बैटरी प्रौद्योगिकियों के विकास के संबंध में अनुसंधान चल रहा है और इस क्षेत्र में जल्द ही सफलता हाथ लगने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार 2030 तक निजी कारों के लिए 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक कारों के लिए 70 प्रतिशत, बसों के लिए 40 प्रतिशत और दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की उम्मीद कर रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए कोयले के बजाय सौर और बायोमास जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली बनाने पर दिया जा रहा है। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन की तकनीक भी विकसित की जा रही है ताकि आने वाले समय में हाइड्रोजन फ्यूल सेल से भी वाहनों को चलाया जा सके।


Click it and Unblock the Notifications








