दिल्ली में इलेक्ट्रिक साइकिल पर मिल रही है 5,500 रुपये की सब्सिडी, पहली 10,000 ई-साइकिलों पर मिलेगा लाभ
अगर आप दिल्ली में रहते हैं और अपने लिए एक इलेक्ट्रिक साइकिल (Electric Cycle) खरीदना चाहते हैं तो इस ऑफर को हाथ से न जानें दें। दिल्ली सरकार अपनी इलेक्ट्रिक नीति के तहत राज्य में खरीदे जाने वाले प्रत्येक इलेक्ट्रिक साइकिल पर 5,500 रुपये की सब्सिडी (Subsidy) दे रही है। यह सब्सिडी पहले खरीदे जाने वाली 10,000 इलेक्ट्रिक साइकिलों तक सीमित होगी।

यही नहीं, पहले 1,000 ई-साइकिल खरीदारों को 2,000 रुपये की अतरिक्त सब्सिडी भी दी जाएगी। सब्सिडी का लाभ साधारण कम्यूटर ई-साइकिल के अतिरिक्त, कार्गो ई-साइकिल और कार्ट ई-साइकिल जैसे कमर्शियल साइकिलों पर भी दिया जाएगा। कार्गो ई-साइकिल पर 15,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी जो पहले 5,000 यूनिट्स तक सीमित होगी।

वहीं ई-कार्ट के व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट ग्राहक 30,000 रुपये तक की सब्सिडी का फायदा उठा सकते हैं। इस नीति का हीरो लेक्ट्रो के सीईओ, आदित्य मुंजाल ने खुलकर स्वागत किया है। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार की इस पहल से पर्सनल और कमर्शियल इलेक्ट्रिक साइकिलों में मांग में वृद्धि आएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह की नीति निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी, साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा देगी।

ई-साइकिल को ईवी सब्सिडी में शामिल करने से डिलीवरी और लॉजिस्टिक कंपनियों को पेट्रोल बाइक के जगह इलेक्ट्रिक साइकिल का इस्तेमाल करने का प्रोत्साहन मिलेगा। पैसेंजर या कार्गो ई-साइकिल फुल चार्ज पर 40-45 किलोमीटर तक चलाए जा सकते हैं, वहीं इनकी टॉप स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है।

वर्तमान में दिल्ली की सड़कों पर 45,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन चल रहे हैं, जिनमें लगभग 6 प्रतिशत दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन हैं। दिल्ली में कुल पंजीकृत वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से अधिक है। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2020 में राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की थी।

इस नीति के तहत दिल्ली में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ऑटोरिक्शा, ई-रिक्शा, और माल गाड़ियों की खरीद पर 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक कार की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन शुल्क से पूरी तरह मुक्त किया गया है।

दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने और स्वच्छ ऊर्जा संचालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2022 में नई कैब एग्रीगेटर नीति की घोषणा की गई है। इसके तहत दिल्ली में फ्लीट कंपनियों को अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना अनिवार्य होगा। दिल्ली सरकार की एक सूचना के अनुसार, मार्च 2023 तक सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने दो-पहिया वाहनों के बेड़े में 50 फीसदी और चार-पहिया वाहनों के बेड़े में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना होगा।

दिल्ली परिवहन विभाग ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल 1 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द किया। राज्य में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा रहा है। वर्तमान में दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को एनओसी नहीं दिया जा रहा है लेकिन सरकार उन्हें अन्य राज्यों में चलाने के लिए एनओसी दे रही है, जहां ऐसे वाहन प्रतिबंधित नहीं है।


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