ऑटो उद्योग को 26 हजार करोड़ की योजनाओं का होगा फायदा, आज मिल सकती है PLI स्कीम को मंजूरी
केंद्र सरकार कोरोना महामारी की मार झेल रही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल संभवत: बुधवार को वाहन क्षेत्र के लिए संशोधित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे सकता है। जानकारी मिली है कि सरकार घरेलू वाहन विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देने और के लिए इस योजना का ऐलान कर सकती है।

जानकारी के अनुसार, सरकार ने पीएलआई योजना में खर्च को घटाकर 26,000 करोड़ रुपये कर दिया है। पिछले साल सरकार ने वाहन तथा वाहन कलपुर्जा क्षेत्र के लिए पांच वर्षों में 57,043 करोड़ रुपये की राशि की घोषणा की थी।

योजना में आवंटित की जाने वाली राशि को कम करने की वजह नहीं बताई गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि सरकार अब बैटरी इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।

इस योजना के तहत ऑटो उद्योग में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक पॉवर स्टीयरिंग सिस्टम, सेंसर, सुपर कैपिसिटर, सनरूफ, अडाप्टिव फ्रंट लाइटिंग, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और काॅलिजन वार्निंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है।

इससे पहले, ऑटो उद्योग निकाय सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मनुफक्चरर्स (SIAM) ने कहा था कि इस योजना की घोषणा बाद उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे भारतीय वाहन उद्योग तरक्की के अगले चरण में पहुंच जाएगा।

क्या है PLI स्कीम
घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और आयात में कटौती करने के लिए केंद्र सरकार ने पीएलआई योजना (PLI Scheme) को शुरू किया है। इसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पाद पर कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। इसके लिए केंद्रीय बजट 2020-21 में सरकार ने 13 उद्योग क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये की पीएलआई योजना की घोषणा की थी जिसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए लगभग 57 हजार करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी।

चीन पर निर्भरता कम करेगी सरकार
ऑटो उद्योग को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर कंपोनेंट के लिए चीनी आयात निर्भरता को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पूरी तरह घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं है। भारत में बनाने वाली गाड़ियों के कई उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं। ऐसे में भारत को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए चीन पर निर्भरता कम करनी होगी।

केंद्रीय एडवाइजरी नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि अगले दो साल के दौरान बैटरियों के दाम नीचे आएंगे जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत कम होगी। इसके लिए जरूरी है कि हम आयत पर निर्भरता को कम करते हुए देश में इनोवेशन, एफिशिएंसी और निवेश को प्रोत्साहनदेने के उपाय करें।


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