बेंगलुरू की सड़कों पर उतारी जाएंगी 300 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें, टेंडर की प्रक्रिया हुई शुरू
90 इलेक्ट्रिक मिनी बसों के सफल संचालन के बाद, बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) 12 मीटर लंबाई की 300 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अशोक लीलैंड इन बसों की आपूर्ति बीएमटीसी को कर रही है, जबकि ड्राइवरों को कॉन्ट्रैक्ट कंपनी मुहैया कराएगी, लेकिन बीएमटीसी के कर्मचारी प्रशासक होंगे।

अधिकारियों द्वारा इसके डिजाइन की मंजूरी के लिए शुक्रवार को बस का एक प्रोटोटाइप बीएमटीसी मुख्यालय लाया गया। अधिकारियों द्वारा डिजाइन को मंजूरी देने के बाद अगले महीने सौ बसों के सड़कों पर उतरने की संभावना है। 40 सीटों की दो दरवाजों वाली बस के चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

द हंस इंडिया के अनुसार, बीएमटीसी इस साल अक्टूबर तक शहर में इस तरह की करीब 300 ई-बसें शुरू करेगी। कंपनी द्वारा बैटरी चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे जिसके लिए तीन बीएमटीसी डिपो और चार स्टेशनों पर जगह की पहचान की गई है। प्रबंधन की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्ट कंपनी खुद संभालेगी और प्रति किलोमीटर की दर से बीएमटीसी कंपनी को भुगतान करेगी। बस को पर्यावरण और विकलांगों के अनुकूल बनाया गया है।

बीएमटीसी ने सितंबर 2019 में अनुबंध के आधार पर 300 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने की निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया में देरी होने के कारण फरवरी 2020 में फेम इंडिया प्रोजेक्ट के तहत मेट्रो फीडर सर्विस के लिए 90 इलेक्ट्रिक मिनी बसों की खरीद के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया था।

जेबीएम कंपनी पहले ही 90 बसों को अनुबंधित और आपूर्ति कर चुकी है जो शहर में चल रही हैं। बीएमटीसी में अगर 300 बसें जोड़ी जाती हैं तो निगम के पास कुल 390 इलेक्ट्रिक बसें हो जाएंगी।

कर्मचारियों द्वारा उठाई गई आपत्ति यह है कि चूंकि कंपनियां इन बसों के लिए ड्राइवर उपलब्ध कराती हैं, इसलिए इतने लोगों का रोजगार निजी क्षेत्र में चला जाएगा। केंद्र सरकार ने ग्रैंड चैलेंज योजना के तहत ई-परिवहन की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए देश के 9 प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने का फैसला किया है। बीएमटीसी प्रबंधन बोर्ड इस योजना के तहत 1,500 बसें खरीदने पर सहमत हो गया है।

बता दें, 2030 तक भारत के 25 राज्यों में 50,000 इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) को तैनात करने के लिए, भारत सरकार की स्वामित्व वाली कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) ने वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्यूआरआई इंडिया) की मदद से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।

सीईएसएल ने पांच शहरों - बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और सूरत में 5,450 ई-बसों को तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुबंध मॉडल पर आधारित निविदा पर खरीदी जाने वाली इलेक्ट्रिक बसें डीजल और सीएनजी बसों की तुलना में क्रमशः 27 प्रतिशत और 23 प्रतिशत सस्ती होंगी। सीईएसएल इन पांच राज्यों में पुराने बसों का आंकड़ा तैयार करेगी जिसेक बाद चरणबद्ध तरीके से इन बसों को हटाकर इलेक्ट्रिक बसों को लाया जाएगा।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क का भी विकास किया जा रहा है। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के वाहन पोर्टल के अनुसार, देश में 10.60 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण किया जा चुका है। वहीं देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 1,742 चार्जिंग स्टेशन परिचालन मे हैं।
नोट: तस्वीरें सांकेतिक हैं।


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