दिल्ली में ड्राइव कर रहें हैं कार, तो इस बात का जरूर रखें ध्यान; वरना कट जाएगा भारी भरकम चालान
कार ड्राइविंग करते समय सीट बेल्ट न लगाने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अभियान शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की विशेष टीम सेट बेल्ट न लगाने वालों पर जुर्माना लगा रही है। पुलिस का कहना है कि यह अभियान सड़क सुरक्षा नियम और सेट बेल्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।

बता दें कि बुधवार को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कुल 17 लोगों को 1,000 रुपये के जुर्माने के साथ चालान जारी किया। विशेष अभियान के पहले दिन, ट्रैफिक पुलिस ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मध्य दिल्ली में कनॉट प्लेस के पास बाराखंभा रोड पर चेकिंग की। इसी तरह का अभियान देश के अन्य राज्यों में भी चलाया जा रहा है।

बता दें, टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (54) की 4 सितंबर को महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, पीछे बैठे मिस्त्री ने सीटबेल्ट नहीं पहना हुआ था। इस घटना के बाद कार की पिछली सीट पर बैठने वालों के लिए भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में चेकिंग के दौरान सेट बेल्ट न लगाने वालों का पुलिस चालान काट रही है।

चेकिंग अभियान के दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 11 बजे सुबह से दिन के 1 बजे कुल 17 लोगों पर प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये का चालान किया। वाहन चालकों पर जुर्माना मोटर वाहन अधिनियम 1989 की धारा 194 बी (सुरक्षा बेल्ट का उपयोग और बच्चों के लिए सीट) के तहत किया गया है।

नई दिल्ली यातायात पुलिस आयुक्त, आलाप पटेल ने कहा कि कानूनी प्रावधान पहले से ही थे लेकिन हाल की घटना (मिस्त्री की मौत) के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पहले से ही सीट बेल्ट पहनने के महत्व के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए एक अभियान चला रही है और कानूनी कार्रवाई बी कर रही है। पिछले हफ्ते, दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के जरिये नागरिकों से अधिक रफ्तार में ड्राइविंग न करने और हमेशा सीट बेल्ट पहनने का आग्रह किया था।

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020 के दौरान सड़क हादसों (Road Accident) में कुल 1,20,806 लोगों की मौत हुई थी। इन हादसों के अधिकतर शिकार युवा थे। रिपोर्ट के कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं के कुल मामलों में 43,412 (35.9%) हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए, जबकि राज्य राजमार्गों पर 30,171 (25%) हादसे हुए। वहीं अन्य सड़कों पर 47,223 (39.1%) दुर्घटनाएं हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सड़क हादसों में मरने वालों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने 2020 के सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मरने वाले 18-60 वर्ष के लोगों में 87.4 प्रतिशत कामकाजी थे।

2020 के सड़क हादसों के रिपोर्ट में ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बताया गया। अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने से 69.3% दुर्घटनाएं हुईं, वहीं सड़क के गलत साइड में ड्राइविंग करने के मामलों में 5.6% दुर्घटनाएं हुईं। सड़क के प्रकार के मामले में, 65% दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुईं, वहीं घुमावदार सड़कों, गड्ढों और सड़कों पर अवैध निर्माण के वजह से 15.2% हादसे हुए।


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