मारुति कारों का लेटेस्ट क्रैश टेस्ट रिजल्ट: 15 में से 9 मॉडल हुईं पास
मारुति कारों का लेटेस्ट क्रैश टेस्ट रिजल्ट बाहर आ गया है। इसके करीब 9 मॉडल्स ने क्रैश टेस्ट पास कर लिया है जिसमें सेलेरियो, इग्निस, स्विफ्ट, डिजायर, अर्टिगा, बलेनो, विटारा ब्रेजा, सियाज और S-क्रॉस है।
मारुति कारों का लेटेस्ट क्रैश टेस्ट रिजल्ट बाहर आ गया है। मारुति की कारों का भारत के नए सेफ्टी क्रैश टेस्ट के आधार पर टेस्ट किया गया, जिसका रिजल्ट बाहर आया है। बता दें कि भारत का नया क्रैश मानदंड 1 अक्टूबर 2019 से देश में चल रही सभी गाड़ियों पर लागू हो जाएगा।

बात करें मारुति क्रैश टेस्ट रिजल्ट की तो इसके करीब 9 मॉडल्स ने क्रैश टेस्ट पास कर लिया है जिसमें सेलेरियो, इग्निस, स्विफ्ट, डिजायर, अर्टिगा, बलेनो, विटारा ब्रेजा, सियाज और S-क्रॉस शामिल हैं। वहीं मारुति ओमनी, जिप्सी, ईको, वैगनआर और ऑल्टो नए मानदंडो पर फेल हो गईं। मारुति को अब अपने इन मॉडल्स की बिक्री या तो बंद करनी पड़ेगी या फिर इन्हें नए सेफ्टी आदर्शों पर अपडेट करना होगा।

मारुति पहले से ही ऑल्टो और वैगनआर के नए वर्जन पर काम कर रही है, इसलिए इन्हें शायद नए क्रैश नियमों के साथ ही उतारा जाएगा। हालांकि मारुति ओमनी, ईको और जिप्सी के बारे में कोई खबर नहीं है कि कंपनी अपनी इन पॉपुलर कारों को अपडेट करेगी या बंद करेगी।

अनुमान है कि मारुति जिप्सी को अपकमिंग सुजुकी जिम्मी से अपडेट किया जाएगा। लेकिन इसके बारें में भी आधिकारिक रूप से अभी तक कुछ नहीं कहा गया है। वैसे जिम्मी को भारत में लॉन्च किया जाना है लेकिन इसके बारे में अभी सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं।

भारत में पिछली बार क्रैश नियमों को अक्टूबर 2017 में अपडेट किया गया था। इसका लक्ष्य कार की सवारी करने वालों के जीवन को सरक्षित करना और भारत के सेफ्टी क्रैश को स्टैंडर्ड लेवल पर लाना।

मारुति ने अपना खुदका क्रैश टेस्ट सेंटर और उसकी सारी सुविधाएं रोहतक, हरियाणा स्थित अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में कर रखी है। कंपनी ने बीच में जानकारी दी थी की उसने अपने सभी मॉडल्स को बनाते समय करीब 40 बार उसका क्रैस टेस्ट किया था और तब जाकर उन कारों को बाजार में उतारा था।

वैसे आमतौर पर भारतीय कारों का क्रैश टेस्ट दुनिया की जाना मानी क्रैश टेस्ट में माहिर कंपनियां जैसे कि ग्लोबल NCAP*, यूरो NCAP या ASEAN NCAP करती हैं। इन कंपनियों द्वारा किये गए क्रैश टेस्ट में बहुत कम भारतीय कारें ही होती हैं जिन्हें पांच स्टार मिलता है। कइयों को एक स्टार तो कइयों को तो ज़ीरो स्टार भी मिलता है।
NCAP* का मतलब न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम.

भारत में नए सेफ्टी नियम आने से निश्चित ही कार कंपनियों पर कुछ दबाव बनेगा और उनपर ध्यान देगी। भारत में ज्यादातर छोटी कारें ही बिकती हैं और इन्हें खरीदने वाले अधिकतर मध्यम वर्ग के होते हैं और वो सेफ्टी पर इतना ध्यान नहीं देते। वो कीतमों की ओर अधिक आकर्षक होते हैं इसलिए जरूरी है कि कंपनियों को ही इसके प्रति सजग किया जाए।

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