एयर, ऑयल और लिक्विड कूल्ड इंजन में क्या होता है अंतर, कौन है कूलिंग में सबसे बेहतर? यहां जानिए
किसी भी वाहन के इंजन में कई ऐसे कल-पुर्जे होते हैं जो लगातार काम करते रहने पर गर्म हो जाते हैं। इंजन के बेहतर तरीके से काम करते रहने के लिए इसके तापमान को नियंत्रित रखना जरूरी है। ऐसे में बाइक के इंजन को ठंडा रखने के लिए इंजीनियरों ने कई तरह की तकनीकें इजात कीं, लेकिन एयर-कूल्ड, लिक्विड कूल्ड और ऑयल कूल्ड इंजन तकनीक को अब तक की सबसे सफल इंजन कूलिंग तकनीक माना गया है।
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आपको बता दें कि आजकल वाहनों में जितने तरह के भी इंजन होते हैं सभी में चिकनाहट के लिए इंजन ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। इंजन के अंदर पुर्जों के लगातार घूमते रहने से यह इंजन ऑयल गर्म हो जाता है जिसे ठंडा रखने के लिए इन तकनीकों की जरूरत होती है। हालांकि इंजन एयर कूल्ड, ऑयल कूल्ड या लिक्विड कूल्ड होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बाइक कितनी महंगी है या बाइक का इंजन कितना बड़ा है।

एयर कूल्ड इंजन
जैसा कि नाम से पता चलता है, एयर-कूल्ड इंजन मोटर को ठंडा करने के लिए बहने वाली हवा का उपयोग करते हैं। आमतौर पर अधिकतर बाइक्स में एयर कूल्ड इंजन दिया जाता है। इस तकनीक सस्ते होने के चलते इसे किफायती बाइक्स में इस्तेमाल किया जाता है।

यह इंजन आमतौर पर 100cc से 200cc की बाइक्स में देखने को मिलता है। एयर कूल्ड इंजन में कई लाइनें होती हैं जिसे फिन्स कहते हैं। इन लाइनों में से हवा इंजन की सतह पर लगती है जिससे इंजन ऑयल ठंडा रहता है। एयर कूल्ड इंजन तीनों तरह के इंजन से ज्यादा किफायती और हल्के होते हैं क्योंकि इनमें किसी भी तरह का अतिरिक्त उपकरण नहीं लगाया जाता।

ऑयल कूल्ड इंजन
ऑयल कूल्ड इंजन एयर कूल्ड इंजन के समान होते हैं, क्योंकि वे भी कूलिंग के लिए हवा से ठंडे होने वाले फिन्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इनमें बाहरी रूप से माउंटेड एक छोटा रेडियेटर लगाया जाता है जो इंजन ऑयल को ठंडा रखने में मदद करता है। इस तकनीक में गर्म इंजन ऑयल पाइप के जरिये रेडियेटर में जाता है और हवा से ठंडा होने के बाद इंजन में वापस चला जाता है।

बाइक के चालू रहने पर यह प्रक्रिया चलती रहती है और इंजन ठंडा रहता है। ऑयल कूल्ड इंजन आमतौर पर 150cc से ज्यादा क्षमता वाली बाइक्स में देखे जाते हैं।

लिक्विड कूल्ड इंजन
लिक्विड कूल्ड इंजन का इस्तेमाल आमतौर पर कार, बस और ट्रक में किया जाता है। हालांकि, तकनीक के आसान होने से अब इनका इस्तेमाल दोपहिया वाहनों में भी किया जा रहा है। दुनिया भर की लगभग सभी वाहन कंपनियां लिक्विड-कूल्ड इंजन का व्यापक रूप से उपयोग कर रही हैं।

इस सिस्टम में इंजन को ठंडा रखने के लिए तरल कूलेंट का इस्तेमाल किया जाता है। यह कूलेंट इंजन के बहार लगे रेडियेटर में भरा जाता है। रेडियेटर के अंदर से कई छोटे-छोटे पाइप लगे होते हैं जिसने अंदर इंजन ऑयल घूमते हुए वापस ठंडा होकर इंजन में चला जाता है।

यह तकनीक प्रभावी रूप से इंजन को ठंडा रखने में कारगर होती है। आमतौर पर लिक्विड कूल्ड इंजन 200cc से ज्यादा क्षमता वाली बाइक्स में दिए जाते हैं। लिक्विड कूल्ड इंजन वाले बाइक महंगे होते हैं। बड़े इंजन वाले टूरिंग बाइक्स में लिक्विड कूल्ड इंजन दिए जाते हैं।


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