साल 2020 में ‘हिट एंड रन’ के 52,000 मामले हुए दर्ज, पीड़ितो को मुआवजा देने के लिए सरकार लाएगी नई योजना
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) भारत में सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) की निरंतर निगरानी कर रहा है। मंत्रालय ने साल 2020 में देश में 'हिट एंड रन' (Hit and Run) श्रेणी के तहत होने वाले हादसों की एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कुल 52,448 मामले सामने आए हैं। परिवहन मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक पूर्ण विश्लेषण साझा करते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस तरह की दुर्घटनाओं में वृद्धि के कारणों पर चर्चा की है।

सड़क सुरक्षा (Road Safety) पर जागरूकता फैलाने की दिशा में एक कदम के रूप में, परिवहन मंत्रालय ने ट्विटर पर सुरक्षित और सुचारू ड्राइविंग के लिए एक जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 2019 में हिट एंड रन के 57,987 और 2018 में 69,822 मामले दर्ज किए गए थे।

'हिट एंड रन' पीड़ितो को मुआवजा देगी सरकार
उन्होंने कहा कि सरकार ने 'हिट एंड रन' मोटर दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक नई योजना को अधिसूचित किया है। इस योजना के तहत हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के मामले में गंभीर चोट के लिए 12,500 रुपये से 50,000 रुपये और मृत्यु के मामले में 25,000 रुपये से 2,00,000 रुपये तक मुआवजे का प्रावधान है। मंत्री ने कहा कि इस योजना का क्रियान्वयन अखिल भारतीय स्तर पर किया जाएगा।

लोकसभा में एक अलग सवाल का जवाब देते हुए, गडकरी ने कहा कि सड़क मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा के लिए प्रावधान करता है। राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि उपयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों पर अधिक जोखिम और अधिक ट्रैफिक वाले गलियारों पर लगाया जाए।

मंत्रालय के अनुसार, साल 2020 के दौरान सड़क हादसों (Road Accident Report 2020) में कुल 1,20,806 लोगों की मौत हुई है। इन हादसों के अधिकतर शिकार युवा थे। रिपोर्ट के कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं के कुल मामलों में 43,412 (35.9%) हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए, जबकि राज्य राजमार्गों पर 30,171 (25%) हादसे हुए। वहीं अन्य सड़कों पर 47,223 (39.1%) दुर्घटनाएं हुईं।

18-45 आयु वर्ग के लोग हुए ज्यादा शिकार
रिपोर्ट के मुताबिक, इन सड़क हादसों में मरने वालों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने 2020 के सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मरने वाले 18-60 वर्ष के लोगों में 87.4 प्रतिशत कामकाजी थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सड़क हादसों में शामिल वाहन श्रेणियों में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की थी। जबकि कार, जीप और टैक्सी जैसे हल्के वाहन एक साथ दूसरे स्थान पर हैं। कुल मृत्यु में दोपहिया सवारों की हिस्सेदारी 2020 के दौरान सबसे ज्यादा (43.5%) रही। सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए 17.8 प्रतिशत लोग पैदल चलने वाले थे।

2020 के सड़क हादसों के रिपोर्ट में ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बताया गया। अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने से 69.3% दुर्घटनाएं हुईं, वहीं सड़क के गलत साइड में ड्राइविंग करने के मामलों में 5.6% दुर्घटनाएं हुईं।

सड़क के प्रकार के मामले में, 65% दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुईं, वहीं घुमावदार सड़कों, गड्ढों और सड़कों पर अवैध निर्माण के वजह से 15.2% हादसे हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि 72% सड़क हादसे और 67% जानलेवा हादसे साफ मौसम में हुए।

2020 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में हुए, लेकिन हादसों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में रही। सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले मौतों में उल्लेखनीय कमी लाने वाले प्रमुख राज्यों में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और केरल शामिल थे।


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