वंदे भारत ट्रेनों के लिए रेलवे ट्रैक को मिलेगी अधिक उर्जा, अगस्त 2023 तक उतारी जाएंगी 75 ट्रेनें
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, भारतीय रेलवे को अपने नेटवर्क पर और अधिक विद्युतीकरण का संचार करने की अनुमति दे गई है, ताकि इसे उच्च गति और अधिक ऊर्जा खपत वाली 'वंदे भारत' ट्रेनों के लिए तैयार किया जा सके। भारतीय रेलवे अपने नए नेटवर्क पर अब केवल 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम को ही अनुमति देगी। यह ट्रैक्शन सिस्टम चीन, जापान, फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में प्रचलित है जहां हाई स्पीड पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं।

रेलवे द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, अगस्त 2023 तक 75 वंदे भारत ट्रेनों को पटरियों पर उतारने की योजना है और अगले तीन वर्षों में 400 ट्रेनों का निर्माण करने की योजना है। वंदे भारत ट्रेनों को सामान्य ट्रेनों से दोगुनी बिजली की जरूरत होती है। मौजूदा ओवरहेड उपकरण (ओएचई) हाई स्पीड ट्रेनों की की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं जिससे भविष्य की मांग को पूरा करने में मुश्किल हो सकती है।

इसलिए ओवरहेड तारों को 2x25kV में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है ताकि रेलवे न केवल और अधिक वंदे भारत ट्रेनें चलाने के लिए तैयार हो, बल्कि भविष्य में हाई स्पीड ट्रेनों के लिए भारतीय रेल नेटवर्क को पूरी तरह तैयार रखा जा सके।

रेलवे ने करीब 1,140 करोड़ रुपये की लागत से दिल्ली और मुगलसराय के बीच उच्च घनत्व खंड पर उन्नत विद्युतीकरण के लिए 1,650 किलोमीटर के ट्रैक पर काम के लिए पहले ही निविदा को अंतिम रूप दे दिया है।

2023-24 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क को पूरी तरह से विद्युतीकृत करने की अपनी योजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में, भारतीय रेलवे ने इस साल अप्रैल तक 65,414 मार्ग किलोमीटर (आरकेएम) में से 52,247 मार्ग किलोमीटर (आरकेएम) का विद्युतीकरण हासिल कर लिया है।

सूत्रों ने संकेत दिया कि जहां सभी नए विद्युतीकरण का काम 2×25 केवी ट्रैक्शन पर पूरा किया जाएगा, वहीं जरूरत के आधार पर पहले के सभी विद्युतीकृत मार्गों का रूपांतरण भी चरणबद्ध तरीके से किया जा सकता है।

बता दें कि वंदे भारत ट्रेनों की बनावट नियमित एक्सप्रेस ट्रेनों से अलग होती है। जहां एक साधारण ट्रेन में सामने इंजन होता है और पीछे डिब्बों को लगाया जाता है, वहीं वंदे भारत ट्रेनों में इंजन नहीं होता बल्कि हर डिब्बे के पहियों में इलेक्ट्रिक मोटर लगा होता है जो ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए अधिक पॉवर उत्पन्न करता है। इन डिब्बों में अलग-अलग ट्रैक्शन मोटर, ट्रांसफार्मर और कनवर्टर लगे होते हैं।

वंदे भारत ट्रेनें सेमी-हाई स्पीड होती हैं, जिसमें प्रत्येक में 16 कोच होते हैं और स्व-चालित होते हैं। इन्हें इंजन की आवश्यकता नहीं होती है। यह वितरित शक्ति ट्रेन को लोको-हेल्ड ट्रेनों की तुलना में कम समय में अधिक गति पकड़ने और ब्रेक लगाने की अनुमति देती है।

16-कोच वाली शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में एक छोर पर इंजन लगा होता है जो लगभग 6,000 हॉर्स पावर की शक्ति प्रदान करता है। लेकिन वंदे भारत में आठ मोटर चालित डिब्बे होते हैं जो ट्रेन को लगभग 12,000 हॉर्स पावर प्रदान करते हैं।


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