बाइक-कार चलाते हैं तो जान लें 2022 में आए ये 5 नियम, नहीं तो होगा नुकसान
किसी भी क्षेत्र में उसकी गुणवत्ता और विकास को बनाए रखने के लिए सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है। इसलिए सरकार समय-समय पर कई नियमों को लाती है, जिन्हें हमें पालन करना होता है। कई बार हमें इन नियमों की जानकारी नहीं होती है। जिसकी वजह से हमें चालान या अन्य माध्यमों से नुकसान होता है।
इसी से बचने के लिए हम यहां पर आपको 2022 में जारी हुए नए 5 नियमों के बारे में बता रहे हैं, तो चलिए जानते हैं। ये बदलाव खासतौर से सुरक्षा, पर्यावरण को देखते हुए किए गए हैं।

1. रियर पैसेंजर सीट बेल्ट अलार्म
इस साल की शुरुआत में, जब टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री की कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वह एक लक्जरी एसयूवी की पिछली सीट पर बैठे थे और उन्होंने अपनी सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। जिससे होने गहरी चोट लगी। जिसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कार निर्माता कंपनियों के लिए रियर सीट बेल्ट के लिए अलार्म सिस्टम को अनिवार्य करने का नियम जारी किया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बार-बार भारतीय सड़कों पर सुरक्षा को लेकर बातें कहते रहते हैं और रियर सीट बेल्ट अलार्म उस दिशा में एक कदम है। यह लगातार बीपिंग अलार्म की तरह काम करेगी जो चालक और यात्रियों को सचेत करेगी कि कार के चलने के दौरान किसी ने बेल्ट नहीं लगाई है।
2. 6- एयरबैग मजबूरी
चार पहिया वाहनों के यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, सरकार ने अक्टूबर, 2023 से भारत में सभी यात्री वाहनों के लिए कम से कम छह एयरबैग से लैस होना अनिवार्य कर दिया है। अभी ज्यादातर बड़े पैमाने पर पैसेंजर वाहन बाजार में हैं। इस सेगमेंट की कुल बिक्री का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ऐसा है जिनमें पर्याप्त एयरबैग नहीं मिलते हैं। इस नियम से मोटर वाहनों में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों की सुरक्षा के हिसाब से बनाया गया है।
3. भारत एनसीएपी वाहन सुरक्षा टेस्टिंग
इस साल भारत ने अपनी वाहन सुरक्षा टेस्टिंग एजेंसी - भारत एनसीएपी की घोषणा की है। गडकरी ने इस साल जून में घोषणा करते हुए कहा था कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ग्राहकों को उनकी स्टार-रेटिंग के आधार पर सुरक्षित कारों का चयन करने के साथ-साथ देश में ओईएम के बीच कंपटीशन को बढ़ावा देना है।
भारत एनसीएपी के लिए टेस्टिंग प्रोटोकॉल मौजूदा भारतीय नियमों को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल के अनुरूप होंगे और यह प्रक्रिया अगले साल से शुरू होगी।
4. बीएस 6 फेज 2 उत्सर्जन मानदंड
ये उत्सर्जन मानदंड 1 अप्रैल 2023 से अपग्रेड होने वाले हैं और ऑटो ओईएम ने अपने उत्पादों में इस बदलाव पर काम करना शुरू कर दिया है। बीएस 6 चरण-2 उत्सर्जन मानदंड यूरो 6 उत्सर्जन के बराबर होंगे, जो मौजूदा स्टैंडर्ड के विपरीत यूरो 5 पर आधारित हैं। वाहनों की वास्तविक समय ड्राइविंग उत्सर्जन स्तरों की निगरानी के लिए ऑन-बोर्ड सेल्फ डायग्नोस्टिक डिवाइस जरूरत होगी। डिवाइस वाहनों में उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हिस्सों की लगातार निगरानी करेगा।
5. ईवी बैटरी स्वैपिंग ड्राफ्ट पॉलिसी
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी शुरुआती दौर में हैं और बैटरी से चलने वाले वाहनों में निवेश करने के लिए जनता को प्रोत्साहित करके टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है। जबकि राज्य सरकारें बेहतर ईवी नीतियों और जागरूकता कार्यक्रमों के साथ आ रही हैं, केंद्र ने इस साल इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी स्वैपिंग के लिए एक नीति जारी की है। इस तकनीक को लास्ट-माइल डिलीवरी और दोपहिया वाहनों में ईवी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह इंस्टैंट बैटरी स्वैपिंग और रेंज की चिंता को दूर करने की अनुमति देता है।


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