यूपी में इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर मिलेगी 1 लाख रुपये की छूट, लागू हुई ई-वाहन नीति
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा कर दी है। अब उत्तर प्रदेश में भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहक छूट का लाभ उठा सकेंगे। इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ही नहीं बल्कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और चार्जिंग स्टेशनों के विकास को भी लक्षित किया है।

ई-वाहनों पर ये शुल्क होंगे माफ
उत्तर प्रदेश सरकार ने ई-वाहन नीति के तहत बड़ी घोषणा की है। सरकार सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में 100 प्रतिशत की छूट दे रही है। यह लाभ ई-वाहन नीति के लॉन्च के बाद तीन साल तक लागू रहेगा। यही नहीं, यूपी में बनाने वाले ई-वाहनों के लिए यह छूट चौथे और पांचवें साल तक लागू रहेगा।

ई-वाहन पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?
यूपी में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर वाहन की एक्स-शोरूम कीमत पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी जो एक वाहन पर अधिकतम 5,000 रुपये तक हो सकता है। यह लाभ 2 लाख टू-व्हीलर बिकने तक लागू रहेगा। वहीं इलेक्ट्रिक कार पर अधिकतम 1 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी जो कि 25,000 कारों के बिकने तक लागू रहेगा।

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए 12,000 रुपये की सब्सिडी निर्धारित की गई है जो कि पहले 50,000 यूनिट तिपहिया वाहनों के बिकने तक लागू रहेगा। यूपी ई-वाहन नीति के तहत इलेक्ट्रिक बसों पर भी सब्सिडी दी जा रही है। इलेक्ट्रिक बस पर 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी जो पहले 400 इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री तक सीमित रहेगा।

चार्जिंग स्टेशन के लिए भी मिलेगी सब्सिडी
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों एक लिए आधारभूत संरचना विकसित करने में भी इलेक्ट्रिक वाहन नीति को समर्पित किया गया है। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पहले 2,000 चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन और चार्जिंग पॉइंट लगाने वाली कंपनियों को पूंजीगत निवेश पर 10 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। राज्य सरकार 1,000 बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों पर 5 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी दे रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मुख्य लक्ष्य ईको फ्रेंडली वाहनों को बढ़ावा देते हुए, यूपी को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक ग्लोबल उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति का लक्ष्य राज्य में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करते हुए 10 लाख से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करना है।

क्या है ई-वाहन नीति का फायदा
इलेक्ट्रिक वाहन नीति (EV Policy) का लक्ष्य प्रदूषण मुक्त वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देना है। इसकी बिक्री को बढ़ाने के लिए सब्सिडी देना, प्रोत्साहन व चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना शामिल है। कई राज्यों ने चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैप स्टेशन लगाने में भी सब्सिडी की व्यवस्था भी की है। इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में दोपहिया वाहन, कार, तिपहिया गाड़ियां और बस शामिल होते हैं। ई-वाहन नीति को एक निश्चित समय के लिए लागू किया जाता है, जिसके पूरा होने के बाद नीति को जारी रखने या रद्द करने पर विचार किया जाता है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। परिवहन मंत्रालय के वाहन पोर्टल के अनुसार, देश में 13 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। वहीं देश के अलग-अलग राज्यों में 2,500 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन परिचालन मे हैं।


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