Budget 2024 Expectations vs Reality: ऑटो इंडस्ट्री की उम्मीदों पर कैसा रहा बजट? जानें इसका पूरा लेखा-जोखा...
Automobile Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया है। इस बजट से ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री को काफी उम्मीदें थी, ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस बार का बजट ऑटो इंडस्ट्री के लिए कैसा रहा? क्या ये उनकी उम्मीदों पर खड़ा उतरा या नहीं। ऐसे तमाम सवालों के जवाब आपको इस लेख में मिलेंगे।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पूर्ण बजट में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए कोई खास घोषणा नहीं की गई, लेकिन इसमें लिए गए कुछ फैसलों का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि ऑटोमोबाइल कंपनियों को काफी उम्मीद थी कि सरकार इस बजट में बड़े बदलावों का ऐलान करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे उन्हें काफी निराशा हुई है।

ऑटो क्षेत्र को बजट 2024 से क्या उम्मीदें थी: भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे यह दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाज़ार बन गया है। इस वृद्धि को देखते हुए, कई लोगों को उद्योग को और बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाओं की उम्मीद थी।
उम्मीदों में वाहनों का उत्पादन बढ़ाने और लोगों के लिए वाहन, ख़ास तौर पर इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) खरीदना आसान बनाने की योजनाएं शामिल थीं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए FAME 3 सब्सिडी कार्यक्रम की घोषणा की उम्मीद थी।

कई लोगों का मानना था कि इस तरह की घोषणा से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं होगी।
जैसा कि अनुमान था, बजट में FAME 3 सब्सिडी के बारे में कोई जानकारी शामिल नहीं की गई। इसके अलावा, भारत में बिकने वाले इलेक्ट्रिक और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों पर कर कम करने की मांग भी की गई थी।

हालांकि, इन करों को कम करने का अधिकार केवल GST परिषद के पास है, इसलिए इन वाहनों के लिए कर कटौती के बारे में भी कोई घोषणा नहीं की गई।
एक और उम्मीद थी कि विदेशों में निर्मित और भारत में आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क में कमी की जाएगी। हालांकि इन करों में पहले भी कमी की गई थी, लेकिन आगे भी इसमें बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन इस मामले में भी कोई नई घोषणा नहीं की गई।
उम्मीद यह भी थी कि पेट्रोल और डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी कर सीमा के GST लाया जाएगा। हालांकि, यह निर्णय भी जीएसटी परिषद के पास है, जिसके कारण बजट में इसके बारे में भी कोई घोषणा नहीं की गई।
भविष्य की संभावनाएं और अंतरिम उपाय: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए FAME सब्सिडी का दूसरा चरण मार्च 2024 में समाप्त हो गया, जिसके तहत 31 मार्च तक अंतरिम सब्सिडी दी गई। लोग अब सोच रहे हैं कि क्या इसे बढ़ाया जाएगा या एक नई FAME 3 सब्सिडी की घोषणा की जाएगी।
केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि वे FAME 3 सब्सिडी के लिए तैयारियों में तेज़ी ला रहे हैं। हालांकि, मौजूदा घोषणाओं से पता चलता है कि लाभ अपेक्षा से कम हो सकता है, जिससे ऑटोमोबाइल कंपनियों में चिंता पैदा हो रही है।
बजट 2024 में ऑटो क्षेत्र के लिए क्या रहा खास: हालांकि ऑटो क्षेत्र को प्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ नहीं मिला, लेकिन बजट में ऐसी कुछ घोषणाएं की गईं, जिसका ऑटो क्षेत्र में आने वाले दिनों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
बुनियादी ढांचे का विकास: बजट में सड़क संपर्क परियोजनाओं में महत्वपूर्ण निवेश की बात कही गई है, खास तौर पर बिहार और आंध्र प्रदेश में। इस बेहतर बुनियादी ढांचे से इन क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल की मांग बढ़ सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहन कच्चे माल के लिए बढ़ावा: बजट में लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क में पूरी छूट का भी प्रस्ताव किया गया है, जो ईवी बैटरी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यह कदम भारत के भीतर इन खनिजों के प्रसंस्करण और शोधन को प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे भविष्य में अधिक मजबूत और लागत प्रभावी ईवी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सकता है।
GST परिषद की बैठक से उम्मीदें: आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए कर लाभ पर चर्चा की जा सकती है। अगर ऐसी घोषणाएं की जाती है, तो भारत में हाइब्रिड वाहनों की कीमतें पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में कम हो सकती हैं।
हालांकि इस बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कई अपेक्षित घोषणाएं नहीं की गईं, लेकिन संभावना है कि आगामी बैठकों के बाद कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक FAME सब्सिडी और हाइब्रिड गाड़ियों पर टैक्स कम करने के बारे में फैसला अभी लिया जाना बाकी है।
हो सकता है इनके साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स मिलकर आने वाले महीनों में ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ावा दें। हालांकि बजट में प्रमुख घोषणाओं की कमी ने भारत में ऑटोमोबाइल निर्माण कंपनियों के बीच चिंता पैदा कर दी है।


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