सुरक्षा के मामले में Kia Carens ने किया निराश, क्रैश टेस्ट में मिली 3-स्टार की रेटिंग
किया कैरेंस (Kia Carens) एमपीवी ने ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (जीएनसीएपी) द्वारा क्रैश टेस्ट 3-स्टार रेटिंग हासिल की है। यह रेटिंग वयस्क और बच्चे दोनों के सेगमेंट में दी गई है। क्रैश टेस्ट में किया कैरेंस के भारतीय मॉडल का इस्तेमाल किया गया था जिसमें दो फ्रंट एयरबैग, दो साइड-बॉडी एयरबैग और दो साइड हेड प्रोटेक्शन एयरबैग लगे थे। यह मॉडल स्टैंडर्ड तौर पर ईएससी के साथ आता है।

ग्लोबल एनसीएपी के महासचिव एलेजांद्रो फुरस ने कहा, "ग्लोबल एनसीएपी छह एयरबैग को कैरेंस में एक स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर बनाने के किया के फैसले का स्वागत करता है। हालांकि, हमें इस मॉडल से बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद थी। यह चिंता का विषय है कि किया जैसे वैश्विक कार ब्रांड, जो आमतौर पर अन्य बाजारों में 5-स्टार रेटिंग हासिल करती है, अभी भी भारत में इस स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।"

किया कैरेंस ने किया निराश
ग्लोबल एनसीएपी ने क्रैश टेस्ट में पाया कि किया कैरेंस एमपीवी की संरचना स्थिर नहीं है। इसके अलावा चालक की छाती और पैरों की सुरक्षा कमजोर है। एजेंसी ने पाया कि किया कैरेंस अभी भी थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट के बजाय रियर मिडिल सीटिंग पोजीशन में लैप बेल्ट के साथ बेची जा रही है। किया कैरेंस ने वयस्क सुरक्षा (adult safety) में कुल 17 अंक में से 9.30 अंक और बाल सुरक्षा (child safety) में 49 में से 30.99 अंक हासिल किए। इस मॉडल का परीक्षण 64 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर किया गया था।

किया सेल्टोस की सेफ्टी भी है निराशाजनक
ग्लोबल एनसीएपी द्वारा परीक्षण किया गया पिछला किया मॉडल सेल्टोस (Kia Seltos) था जिसे वयस्कों की सुरक्षा के लिए 3 स्टार और बच्चों की सुरक्षा के लिए 2 स्टार मिले थे। किया सेल्टोस का यह मॉडल दो एयरबैग और प्रीटेंशनर एबीएस ब्रेकिंग जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स से लैस था लेकिन बॉडी शेल को अस्थिर होने के चलते सेल्टोस का प्रदर्शन खराब रहा।

क्या है ग्लोबल एनसीएपी?
ग्लोबल एनसीएपी यानी ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम ( Global New Car Assessment Program) एक ऐसी संस्था है जो स्वतंत्र रूप से नई कारों का कई मापदंडों पर क्रैश टेस्ट कर उन्हें रेटिंग प्रदान करती है। यह संस्था टेस्ट की गई कारों को 0-5 स्टार की रेटिंग प्रदान करती है। कार कंपनियों के लिए ग्लोबल एनसीएपी रेटिंग काफी महत्व रखता है क्योंकि रेटिंग मिलने से कारों की बेहतर मार्केटिंग होती है।

तकनीकी तौर पर इस क्रैश टेस्ट में सबसे कम रेटिंग या स्टार लाने वाली कारें दुर्घटना के समय सुरक्षित नहीं मानी जाती हैं। टेस्ट की गई कारों को 0-5 स्टार रेटिंग दी जाती है। एक से तीन स्टार रेटिंग वाली कारें दुर्घटना के समय सबसे कम सुरक्षा प्रदान करती हैं, जबकि 4 से 5 रेटिंग प्राप्त करने वाली कारें सबसे अधिक सुरक्षित होती हैं। क्रैश टेस्ट रेटिंग को एडल्ट सेफ्टी, चाइल्ड सेफ्टी समेत कई मानकों पर बांटा जाता है। कार के अंदर ड्राइवर सीट और पैसेंजर सीट पर मानव आकार में कठपुतलों को बैठाया जाता है और क्रैश से उनपर पड़ने वाले प्रभाव की जांच की जाती है।

सॉनेट की चल रही शानदार बिक्री
आपको बता दें कि किया सॉनेट के लॉन्च के महज 2 साल के भीतर ही कंपनी ने 1.5 लाख यूनिट की बिक्री कर ली है। कार निर्माता ने कहा कि सॉनेट ने बिक्री में एक तिहाई से भी ज्यादा का योगदान दिया है। वर्तमान में किया इंडिया की 32 फीसदी से ज्यादा बिकने वाली मॉडल सॉनेट ही है। कंपनी ने यह भी कहा कि सॉनेट खरीदने वाले 26 फीसदी ग्राहक टॉप मॉडल खरीदना पसंद करते हैं। भारत के सबसे लोकप्रिय और प्रतिद्वंदी चार मीटर से छोटी कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में सॉनेट ने 15 फीसदी की हिस्सेदारी रखती है।

किया सॉनेट को 2020 में लॉन्च किया गया था। यह सेल्टोस के बाद ब्रांड की दूसरी कार थी। किया का दावा है कि सॉनेट के बिकने वाले 25 फीसदी मॉडल iMT गियरबॉक्स वाले मॉडल हैं। वहीं ग्राहक सॉनेट के ग्लेशियर व्हाइट पर्ल और औरोरा ब्लैक पर्ल को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। किया सॉनेट अपने सेगमेंट में टाटा नेक्सन, निसान मैग्नाइट और रेनॉल्ट काइगर को टक्कर देती है।


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