कोरोना इफेक्टः अप्रैल के पहले 15 दिनों में ईंधन की बिक्री में आई 50% की गिरावट
कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। जहां एक ओर हजारों लोग इस खतरनाक वायरस से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सारे व्यापार और यातायात भी पूरे देश में बंद हो गया है। सड़कों पर वाहन न चलने से पेट्रोल की खपत भी कम हो गई है।

जानकारी के अनुसार अप्रैल के पहले हफ्तों में भारत के राज्यों में खुदरा ईंधन विक्रेताओं में करीब 50 प्रतिशत कम ईंधन की बिक्री की है। बता दें कि भारत के राज्यों में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के 90 प्रतिशत आउटलेट हैं।

गैसोलीन की बिक्री पर ध्यान दें तो अप्रैल के पहले 15 दिनों में राज्य स्तर पर इसकी बिक्री में करीब 61 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वहीं जेट फ्यूल की बिक्री की बात करें तो इसमें 64 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है।

आपको बता दें कि पूरे भारत में ईंधन की मांग में ईंधन तेल, कोलतार और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत सबसे ज्यादा है। राज्य-खुदरा विक्रेताओं ने अप्रैल के पहले 15 दिनों में पिछले साल से 21 प्रतिशत ज्यादा एलपीजी बेची है।

ऐसा इसलिए हैं क्योंकि इस लॉकडाउन के दौरान भारत सरकार गरीब लोगों को निःशुल्क एलपीजी गैस मुहैया करा रही है, जिससे उन्हें राहत हो सकती है। बता दें कि भारत सरकार ने लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है।

लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने इस बात की अनुमति दे दी है कि जिन इलाकों में कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं है और उन्हें हॉट स्पॉट घोषित नहीं किया गया है, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ औद्योगिक इकाइयों को शुरू किया जा सकता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने भारत में ईंधन की खपत को लेकर अपनी एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में आईईए ने बताया है कि जहां मार्च में ईंधन की मांग में 2.4 प्रतिश की बढ़त हुई थी, वहीं अब साल 2020 में 5.6 प्रतिशत की गिरावट देखी जाएगी।


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