BS6 Transformation: 2020 ऑटो स्टोरीज: इस साल लागू हुआ बीएस6 उत्सर्जन मानक, जानें कारण, लाभ
इस साल मार्च में नए बीएस6 (भारत स्टेज) उत्सर्जन मानक लागू किये गये हैं, यह वाहनों के उत्सर्जन मानक का एक स्टेज है, जिसके तहत वाहन से उत्सर्जित किये जाने वाले प्रदूषण को कम करना था। भारत में बीएस4 के बाद सीधे बीएस6 को लागू किया गया है, बीएस5 को छोड़ा गया ताकि कड़े उत्सर्जन मानक नियम लाये जा सके, यह मार्च 2020 से प्रभाव में आये हैं।

बीएस6 उत्सर्जन मानक क्या है?
बीएस का अर्थ है भारत स्टेज, यह वाहनों में प्रदूषण मापने का मानक है। यह वाहन के इंजन से निकलने वाले प्रदूषक तत्व जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर को मापने का एक तरीका है। बीएस के आगे लगने वाले नंबर प्रदूषण के कम स्तर को बताता है यानि जितना अधिक नंबर होगा वाहन उतना कम प्रदूषण उत्सर्जित करेगी।

इसे सरकार ने साल 2000 में पहली बार लाया था तथा परिस्थिति अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय समय पर नए मानक को लागू करता है। बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए बीएस-5 को छोड़ दिया गया है तथा सीधे बीएस-6 लागू किया गया है। बीएस-4 के पहले देश में बीएस-3 लागू था। बदलते मानक स्तर के साथ कंपनियों को वाहन के इंजन को अपग्रेड करना होता है।

बीएस6 को लाये जाने के पहले कहा जा रहा था कि पेट्रोल, डीजल वाहनों की कीमत में बहुत अधिक उछाल आयेगा तथा छोटे डीजल इंजन की कीमत इतनी अधिक होगी कि इन्हें बंद करना पड़ जाएगा। वैसे यह मानक लागू होने के बाद अभी भी कई कंपनियां छोटे डीजल इंजन की बिक्री कर रही है और कीमत में बड़ा अंतर नीं आया है।

हालांकि छोटे डीजल इंजन बहुत प्रभावित हुए है। मारुति, रेनॉल्ट जैसे कंपनियों ने डीजल इंजन ही बंद कर दिए हैं तथा टाटा मोटर्स ने छोटे डीजल इंजन बंद कर दिए हैं, लेकिन हुंडई, महिंद्रा, किया मोटर्स जैसी कंपनियां अभी भी छोटे डीजल इंजन की बिक्री कर रही है, लेकिन इससे छोटे कारों की कीमत बहुत अधिक हो गयी है।

बीएस6 का लाभ क्या है?
- बीएस-6 उत्सर्जन मानक के आने से वाहनों के इंजन से निकलने वाले प्रदूषक तत्व जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर आदि की मात्रा में कमी होगी, जिसे वातावरण वाहनों से निकलने वाले धुएं से कम प्रभावित होगा।
- बीएस-6 वाहन बीएस-4 वाहन के मुकाबले, पेट्रोल व डीजल इंजन से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 25 प्रतिशत तक तथा सल्फर की मात्रा पांच गुना तक कम हो जाएगी।
- इससे वाहनों के वाहनों में ईंधन दहन की मात्रा कम हो सकती है यानि बीएस-6 वाले इंजन बीएस-4 इंजन वाहन के मुकाबले अधिक माइलेज प्रदान कर सकती है।

भारत में बीएस-6 उत्सर्जन मानक लागू करने के दौरान कई चुनौतियां भी आई है लेकिन इन्हें धीरे-धीरे निपटाया जा रहा है, जैसे बीएस6 की उपलब्धि थी लेकिन अब इसे सब जगह उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही छोटे कारों में डीजल इंजन का ना होना भी खलता है लेकिन अब कम बजट में अधिक माइलेज के लिए कई कंपनियां सीएनजी, हाइब्रिड तथा इलेक्ट्रिक के विकल्प लाये जा रहे हैं।

कार व बाइक से इतर ट्रैक्टर के लिए बीएस6 उत्सर्जन कानून को अगले साल अक्टूबर से लागू किया जा रहा है, साथ ही निर्माण कार्य में लगने वाले वाहनों पर उत्सर्जन कानून अप्रैल 2021 से लागू होगा। केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम (1989) में संशोधन कर अक्टूबर 2020 से ट्रैक्टरों के लिए लागू होने वाले उत्सर्जन मानकों को अब अक्टूबर 2021 से लागू कर रही है।


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