अब ट्रैफिक नियम तोड़ने से रोकेंगे पुतले, बेंगलुरु पुलिस ने शुरु की अनोखी पहल
ट्रैफिक नियम सड़क पर लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं लेकिन कुछ लोग इसे महज जुर्माने लिए मानते हैं। जहां ट्रैफिक पुलिस नहीं होती है वहां लोग ट्रैफिक लाइट जंप करते हैं और नियम तोड़ते हैं।

ऐसे लोगों से निबटने के लिए बेंगलुरु पुलिस ने एक बेहद अनोखा तरीका निकाला है। बेंगलुरु पुलिस पुतलों को ट्रैफिक पुलिस की वर्दी पहनाकर सड़कों पर तैनात कर रही है, ताकि लोग इसे ट्रैफिक पुलिस समझकर नियमों का पालन करें।

क्यों खड़े किए पुतले
ट्रैफिक पुलिस ने इस पहल को ट्रायल के तौर पर शुरू किया है। पुरे शहर में अलग जगहों पर ट्रैफिक पुलिस की वर्दी में पुतलों को तैनात किया गया है। पुलिस का मानना है कि लोग इन्हे ट्रैफिक पुलिस समझ कर ठीक से वाहन चलाएंगे।

बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस चीफ रविकांत गौड़ा ने कहा कि लोग ट्रैफिक पुलिस की गैर-हाजरी में ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करते हैं। पुतलों को इसलिए रखा गया है जिससे लगे की पुलिस उन्हें देख रही है।

अधिक पुतले होंगे तैनात
पुलिस ने कहा कि अगर ट्रायल सफल हुआ तो कई और जगह भी ऐसे 175 पुतले रखे जाएंगे। पुतलों में सीसीटीवी कैमरा भी लगाए जाएंगे जिससे नियम का उल्लंघन करने वालों की वीडियोग्राफी कर उन्हें पकड़ा जाएगा।

पुलिस ने बताया कि इन पुतलों की जगह लगातार बदली जाएगी। अब लोग ट्रैफिक लाइट जंप करने, ज्यादा स्पीड में वाहन चलाने, चलते हुए मोबाइल पर बात करने में दो बार सोचेंगे।

ऐसे पकड़े जाएंगे उल्लंघनकर्ता
पुलिस का कहना है कि कुछ दिन में लोग आदि हो जाएंगे कि ये सिर्फ दिखावटी पुतले हैं और फिर असावधान हो जाएंगे लेकिन खेल यहां से शुरू होगा। कुछ दिन बाद पुतलों की जगह असली पुलिस वाले ले लेंगे और नियम तोड़ते चालकों को पकड़ लेंगे।

हालांकि, एक टॉप आईपीएस अधिकारी ने कहा है कि ट्रैफिक पुलिस की ये पहल 'अपरंपरागत' है और इसकी ट्रैफिक पुलिस में कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाओं के माध्यम से कानून लागू नहीं नहीं किया जा सकता। इससे लोग पुलिस को गंभीरता से लेना बंद कर देंगे और पुलिस की एक झूठी छवि बन जाएगी।

अधिकारी ने कि ऐसे कदम बहुत देर तक अनुशासन कायम नहीं रख सकते और इससे पुलिस की मेहनत और समय दोनों बर्बाद होगा।
ड्राइवस्पार्क के विचार
पुलिस के द्वारा उठाया गया ये बेहद अनोखा कदम है, लेकिन इस बात पर उलझन है की यह पहल कितना सफल होगा। ऐसा हो सकता है कि पुतलों के कारण लोग पुलिस को गंभीरता से लेना बंद कर दें। बेहतर होगा की पुलिस तकनीक की उत्तम माध्यमों का इस्तेमाल करे और सड़क, चौराहों पर ज्यादा पुलिस वालों को तैनात करे।


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