20 वर्ष पूर्ण हो जाने पर कबाड़ के भाव बिकेंगे कमर्शियल व्हीकल
केंद्र सरकार की 'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' धीरे-धीरे आगे बढ़ती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के अधिकारी और मंत्रीयों ने इस पर खुलकर बयान दिया है और इसका समर्थन भी किया है। 'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' के तहत 20 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहन सड़कों पर चलाने के लिए कानूनी रूप से अवैध हो जाएंगे। अनुमान है कि ये योजना 1 अप्रैल 2020 से लागू हो जाएगी और इसकी जद में सन 2000 से पहले के कमर्शियल वाहन आएंगे।

'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' को लेकर सरकार ने कई फायदे गिनाए हैं। पहली बात तो सबको पता है कि पुराने वाहन शहरों में प्रदूषण फैलाने के बड़े कारणों में से एक है। यहि इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य भी माना जा रहा है कि सरकार को उत्सर्जन को कम-से-कम करना है। गौरतलब है कि हर देश में आज-कल उत्सर्जन नियम काफी कडे़ हो गए हैं और भारत सरकार भी इस दिशा में आगे बढ़ रही है।

दुसरा सरकार का कहना है कि जब वाहन के बीस वर्ष पूर्ण हो जाएंगे तो उन्हें स्क्रैप यानी नष्ट करवाने के लिए स्क्रैप सेंटर में बेचा जा सकेगा, जिसका वाहन मालिकों को वाजिब दान मिलेगा। इस स्क्रैप को स्टील इंडस्ट्री को दिया जाएगा और देश में स्टील की मांग भी पुरी होगी और विदेशों से कम स्टील आयात करना पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।

'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' के तहत केंद्र सरकार देश में कई बड़े-बड़े स्क्रैप सेंटर खोलेगा। इसमें पुराने हो चुके वाहनों को खरीदा जाएगा। अपने पुराने व्हीकल यहां बेचने पर सरकार कार मालिकों को उसका उचित दाम देगी और साथ ही नई कार खरीदने के लिए भी कई तरह से मदद करेगी।

पुराने कमर्शियल वाहन को नए से रिप्लेस करने पर सरकार वाहन मालिकों को नया वाहन खरीदने में GST टैक्स में कुछ छुट देगी और साथ ही मैन्यूफैक्चरर से भी छुट दिलवाएगी। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए उन्हें स्क्रैप सेंटर पर वाहन के सभी कागजात जमा करवाने होंगे। वाहन स्क्रैप होने पर स्क्रैप सेंटर से उन्हें सर्टीफिकेट मिलेगा। इस सर्टीफिकेट को दिखाकर वो सरकार द्वारी दिये जा रहे टैक्स और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

अनुमान के मुताबिक 'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' के लागू हो जाने से करीब 7 लाख वाहन इसकी जद में आएंगे। इस वक्त सड़कों पर करीब 6 लाख से अधिक कमर्शियल व्हीकल सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नई पॉलिसी के तहत ये सब वाहन बेकार हो जाएंगे।

हालांकि 'व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी' को अभी तक कानूनी रूप से मंजूरी नहीं मिल पाई है। वैसे प्रतिकात्मक तौर पर इसे प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रिय सड़क परिवहन मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है। एक बार इसे कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी तो इसे GST काउंसिल के पास भेजा जाएगा।

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