पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर लगी आग - 2013 के बाद अपने रिकॉर्ड स्तर पर
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर आग लगी है। दीन-ब-दिन शहर-दर-शहर पेट्रोल की कीमतें आसमान छूती जा रहीं हैं। शुक्रवार को मुंबई में पेट्रोल की कीमत 81.93 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 69.54 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई। 2013 के बाद से यह अब तक की सबसे ज्यादा कीमत है।
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अन्य मुख्य शहरों कि बात करें तो शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.08 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 65.31 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। वहीं कोलकाता में पेट्रोल 76.85 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 68.01 रुपये प्रति लीटर पर है।

गौरतलब हो कि सरकारी तेल कंपनियां पिछले साल जून से रोजाना तेल के दामों को निर्धारित करती है।

पेट्रोल-डीजल की इन बढ़ती कीमतों के लिए अंतराष्ट्रिय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन इसके पीछे और भी कई कारण है। जैसे केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले एक्साइज ड्यूटी और वैट।

केंद्र सरकार ने पीछले साल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी को 9.48 रुपए प्रतिलीटर से बढ़ाकर 21.48 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। सरकार इसमें समय-समय पर इजाफा और कटौती करती रहती है। अक्टूबर 2017 में इसमें दो रुपए प्रति-लीटर की कटौती कर दी गई थी। वहीं डीजल में ड्यूटी में 4 बार से ज्यादा बार इजाफा किया गया और यह 3.56 रुपए प्रति लीटर के स्तर से बढ़कर 17.33 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं अक्टूबर 2017 में इसमें भी 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती हुई और इसी के साथ यह 15.33 रुपए प्रति लीटर की दर पर आ गया।

पेट्रोल की कीमत में वैट भी शामिल होता है, जो कि अलग अलग राज्यों में अलग अलग हो सकता है। देश के करीब 26 राज्यों में यह दर 25 फीसद की है। राज्य के रेवेन्यू में इस पेट्रोल वैट का बहुत बड़ा हिस्सा होता है।

बता दें कि डीजल की रिटेल सेलिंग प्राइज में 44.6 फीसद हिस्सा टैक्स का होता है। वहीं पेट्रोल की रिटेल सेलिंग प्राइज में 51.6 फीसद हिस्सा टैक्स का होता है। यही कारण है कि तमाम राज्य और केंद्र सरकारें पेट्रोल-डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाए जाने का विरोध कर रहीं हैं।

यदि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो इनकी कीमतें धड़ाम से नीचें गीर जाएंगी। उदाहरण के लिए अगर अभी सरकार पेट्रोल की कीमत को जीएसटी के सबसे ऊंचे दर वाले स्लैब (18 फीसदी) में भी रखती है तो इसकी कीमत करीब 50 रुपये लीटर हो जाएगी।


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