ऑटोमोबाइल जगत के लिए एक भूल जाने वाला वर्ष साबित हुआ यह साल

देश की प्रमुख कार कंपनी मारुति सुजुकी तो श्रमिकों की हड़ताल से प्रभावित रही ही, जनरल मोटर्स और एमआरएफ भी बुरी खबरों की वजह से चर्चा में रहीं। इस साल उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक घटना बी एम मुंजाल की अगुवाई वाले हीरो समूह की नई ब्रांड पहचान रही। जापान की होंडा के अलग होने के बाद हीरो समूह ने अपनी नई ब्रांड पहचान स्थापित की। इस साल कार बाजार में कई नए रोमांचक माडल पेश किए गए।
ह्युंडई ने 800 सीसी की कार इयान को बाजार में पेश किया। सिंगूर में भूमि को वापस लौटाने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार और टाटा मोटर्स के बीच कुछ गहमागहमी भी देखने को मिली। हालांकि, बिक्री के मामले में यह साल काफी खराब साबित हो रहा है और 2011-12 में वाहन बिक्री की वृद्धि दर एक अंक में ही रहने की संभावना है। पिछले वित्त वर्ष में वाहनों की बिक्री में 25 फीसद से अधिक का इजाफा हुआ था।
महंगाई के बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार ब्याज दरों में बढ़ोतरी से वाहन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। ईंधन खासकर पेटोल दामों में बढ़ोतरी से वाहनों की बिक्री पर असर हुआ। जनवरी, 2011 में कारों की बिक्री 26.28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ अपनी सर्वकालिक उंचाई 1,84,332 इकाई पर पहुंच गई। मंदी के लौटने की आशंका से भी वाहनों की बिक्री पर असर पड़ा।
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने 2011-12 के लिए दो बार वृद्धि दर के अनुमान को कम किया। सालाना आधार पर जुलाई से ही देश में कारों की बिक्री में गिरावट आ रही है। खासकर मारुति में श्रम संबंधी समस्या से बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई। अक्तूबर में मासिक बिक्री का आंकड़ा 11 साल के निचले स्तर पर आ गया। माह के दौरान बिक्री में 23.77 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि नवंबर में कार बाजार में थोड़ी रौनक लौटी और बिक्री में मामूली सात फीसद का इजाफा हुआ। सियाम का मानना है कि दिसंबर में बिक्री का आंकड़ा नवंबर से कम रहेगा।


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