हड़तालों से तबाह रहा दिग्गज

मारुति के मानेसर संयंत्र में इस साल तीन बार हुई हड़ताल से 60 दिन के उत्पादन का नुकसान हुआ। खासकर स्विफ्ट माडल का उत्पादन प्रभावित हुआ। श्रम संबंधी समस्या से अन्य वाहन कंपनियां भी अछूती नहीं रहीं। कुल मिलाकर मारुति को करीब 50,000 इकाइयों के उत्पादन का नुकसान हुआ। जो राजस्व की दृष्टि से 2,000 करोड़ रुपये बैठता है।
सिर्फ हड़ताल जैसे कारणों से ही नहीं, प्राकृतिक आपदाओं से भी वाहन कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। जापान में सूनामी से मारुति सुजुकी, टोयोटा और होंडा पर असर पड़ा। कलपुर्जो की कमी की वजह से टोयोटा और होंडा को भारत में अपने उत्पादन में 50 फीसद से अधिक की कटौती करनी पड़ी। जनरल मोटर्स भी इस साल श्रम समस्या से जूझती रही। उसके हलोल संयंत्र में कर्मचारियों की हड़ताल से 50 दिन के उत्पादन का नुकसान हुआ।
हालांकि कंपनी ने नुकसान का आंकड़ा नहीं दिया है, कर्मचारियों का कहना है कि उत्पादन नुकसान 2,000 से 2,500 इकाई के बीच रहा। टायर बनाने वाली कंपनी सिएट के 1,600 कर्मचारी 29 सितंबर को 23 दिन की हड़ताल पर चले गए। इसी तरह जून में टायर कंपनी एमआरएफ के कोट्टायम संयंत्र में श्रमिकों की हड़ताल से चार दिन तक उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। कुल मिलाकर यह वर्ष भारतीय ऑटोमोबाइल जगत के लिए एक कभी न भूलने वाली याद देकर जा रहा है। इस वर्ष वाहन निर्माता से लेकर ग्राहक तक सभी परेशान रहे जिसका परिणाम ऑटोमोबाइल जगत झेल रही है।


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