भारत में दुनिया के सबसे बड़े स्कूटर प्लांट के लिए होंडा ने रखी नीव
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्रा. लिमिटेड (एचएमएसआई) कंपनी ने भारत के विट्ठलपुर में अपने चौथे विनिर्माण प्लांट के निर्माण का पहला नीव का पत्थर रखा।
विट्ठलपुर की 250 एकड़ ज़मीन पर फैला होंडा का चौथा टू-वीलर प्लांट अहमदाबाद शहर से लगभग 80 किमी दूर है। साल 2015 के अंत तक, यह प्लांट 1.2 मिलियन इकाइयों का उत्पादन कर पाएगा। यह प्लांट इस कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी एकमात्र स्कूटर विनिर्माण कंपनी बना देगी।
इस समारोह में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, गुजरात के वित्त मंत्री सौरभ पटेल एवं गुजरात सरकार के अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस समारोह में होंडा के अधिकारियों में नोराईकी अबे, सीओओ (एशिया एवं ओशिनिया क्षेत्र) - होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड, यॉशियुको मात्सुमोतो, प्रबंध अधिकारी - होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड तथा होंडा मोटर इंडिया प्रा. लिमिटेड के अध्यक्ष व सीईओ, केट मुरामात्शु, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट के अध्यक्ष व सीईओ, हरभजन सिंह, जनरल एवं कारपोरेट मामलों के उपाध्यक्ष, यादविंदर, एस गुलेरिया बिक्री एवं विपणन के उपाध्यक्ष शामिल थे।

यह प्लांट एचएमएसआई की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता को 5.8 मिलियन इकाइयों तक बढ़ा देगा। इसमें पहले प्लांट की 1.6 मिलियन इकाइयां, दूसरे प्लांट की 1.2 मिलियन इकाइयां व तीसरे प्लांट की 1.8 मिलियन इकाइयां शामिल हैं।
नोराईकी अबे, होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया वाहन बाजार के रूप में भारत पहले से ही होंडा के लिए एक प्रधान बाजार रहा है। इस साल होंडा ने दुनिया भर में 18.2 मिलियन दोपहिया वाहनों को बेचने का लक्ष्य रखा है तथा भारत पहली बार, वैश्विक होंडा की बिक्री में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान करेगा।"
इस अवसर पर केट मुरामात्शु, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट के अध्यक्ष व सीईओ ने कहा, "समग्र दोपहिया उद्योग की तुलना में भारतीय स्वचालित स्कूटर बाजार ढाई गुना तेजी से बढ़ रहा है। आप जिस होंडा स्वचालित स्कूटर को चलाते हैं वह केवल "मेड इन इंडिया" ही नहीं होगा बल्कि "मेड़ इन गुजरात" भी होगा।
40 से भी अधिक देशों में अपनी वैश्विक उपस्थिति के साथ, 2013-2014 तक होंडा की दुनिया भर में दोपहिया वाहनों की बिक्री की मात्रा 17 मिलियन यूनिट थी। विश्व स्तर पर पहली बार भारत ने अपने 20 प्रतिशत के आंकडे को पार किया तथा 2013-2014 में विश्व स्तर पर भारत ने पहली बार स्वयं को दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता घोषित किया।


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