हीरो स्प्लेंडर खरीदने वालों के लिए अलर्ट: फ्लेक्स-फ्यूल के चक्कर में न फंसें, गांव के लिए पेट्रोल ही बेस्ट!

आज मंगलवार, 21 जुलाई को भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल E20 से ज्यादा ब्लेंडिंग की कोई योजना नहीं है। इस बड़े ऐलान का सीधा असर उन ग्रामीण खरीदारों पर पड़ेगा जो Hero Splendor सीरीज के नए फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन को खरीदने की सोच रहे थे। गांव-देहात के उन लोगों के लिए, जो बजट का खास ख्याल रखते हैं, अब फ्यूल के इन विकल्पों को समझना बेहद जरूरी हो गया है।

दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में E85 फ्यूल स्टेशन तो बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इनकी पहुंच अभी भी बहुत सीमित है। गांव के ज्यादातर बाइक सवार आज भी उन्हीं स्थानीय पंपों पर निर्भर हैं जहां फिलहाल स्टैंडर्ड पेट्रोल ही मिलता है। ऐसे में रेगुलर स्प्लेंडर मालिकों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें स्पेशल इथेनॉल फ्यूल ढूंढने की माथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी।

Hero Splendor Flex-Fuel vs Petrol: Why Rural Buyers Should Stick to Standard Petrol in 2026

E20 सरकारी नियम और ग्रामीण इलाकों में फ्लेक्स फ्यूल की हकीकत

मानसून के दौरान गांव की नमी वाली सुबह या कड़ाके की ठंड में फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों को स्टार्ट करने में अक्सर दिक्कत आती है। इथेनॉल की ज्यादा मात्रा नमी को सोखती है, जिससे फ्यूल टैंक में जंग लगने और इंजन के रुक-रुक कर चलने (idling) की समस्या हो सकती है। पुराने कार्बोरेटर वाले सिस्टम के मुकाबले स्टैंडर्ड फ्यूल इंजेक्शन (FI) मॉडल इन हालातों को बेहतर तरीके से संभाल लेते हैं। इसके अलावा, अगर बाइक लंबे समय तक नमी वाले फार्म शेड में खड़ी रहे, तो नमी से होने वाले नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।

इथेनॉल प्रति लीटर सस्ता तो है, लेकिन शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले इसमें एनर्जी कम होती है। फ्लेक्स-फ्यूल वाली स्प्लेंडर में माइलेज करीब 15 फीसदी तक गिर सकता है। अगर आप रोजाना 50 किलोमीटर चलते हैं, तो मेंटेनेंस के खर्च को जोड़कर देखें तो आपकी बचत खत्म हो सकती है। ज्यादा फ्यूल खपत का मतलब है बार-बार पेट्रोल पंप के चक्कर लगाना, जिससे कामगारों का कीमती समय बर्बाद होता है। सीधा हिसाब लगाया जाए तो छोटी दूरी के सफर के लिए आज भी पेट्रोल ही सस्ता पड़ता है।

फीचर पेट्रोल स्प्लेंडर फ्लेक्स-फ्यूल HF डीलक्स
फ्यूल कंपैटिबिलिटी E20 तक E20 से E85 तक
माइलेज पर असर स्टैंडर्ड परफॉर्मेंस करीब 15% की कमी
ग्रामीण उपयोगिता बेहतर अभी ट्रायल मोड में

गांव के आम बाइक सवारों के लिए फिलहाल रेगुलर पेट्रोल मॉडल ही ज्यादा सुकून देने वाले हैं। जब तक दूर-दराज के इलाकों में E85 पंप नहीं पहुंच जाते, तब तक फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना एक गैर-जरूरी खर्च लग सकता है। ग्रामीण खरीदारों को आज भी अपने डेली सफर के लिए बेहतर माइलेज और स्पेयर पार्ट्स की आसान उपलब्धता को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

Article Published On: Tuesday, July 21, 2026, 18:33 [IST]
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