क्या ABS Mandate होने से कम हो जाएंगे एक्सीडेंट? इस फैसले का टू-व्हीलर मार्केट पर होगा ये असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दोपहिया वाहन बाजार है। यही कारण है कि देश की सड़कों पर सबसे ज्यादा टू-व्हीलर्स की आवाजाही देखने को मिलती है। दोपहिया वाहन कार और अन्य मोटर व्हीकल के मुकाबले कम सुरक्षित माने जाते हैं और सड़कों पर इनसे होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या भी ज्यादा है।
हर साल हजारों लोग दोपहिया वाहन से होने वाले एक्सीडेंट के चलते अपनी जान गवां देते हैं। TOI के मुताबिक लगातार बढ़ रहे एक्सीडेंट की संख्याओं में कमी लाने और राइडर्स को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकार सभी टू-व्हीलर्स में ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) को अनिवार्य करने वाली है।

बदलाव की बयार, क्या मार्केट है तैयार?
फिलहाल 125 सीसी या उसके ऊपर क्षमता वाले दोपहिया वाहनों में ABS देना जरूरी है। अब 100 सीसी बाइकों या स्कूटरों के साथ दोपहिया इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों को भी इस फीचर के साथ पेश करना जरूरी होगा। हालांकि, इस राह में कई समस्याएं भी आएंगी।
इसमें वाहन की कीमत बढ़ने से लेकर सेल घटने जैसे कारक शामिल हैं। आइए जानते हैं कि सरकार के इस कदम से दोपहिया वाहन चालकों को कितना लाभ होगा और मार्केट को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दोपहिया वाहन की बढ़ जाएगी कीमत
बेशक एंट्री लेवल दोपहिया वाहन ABS आने के साथ सेफ हो जाएंगे, लेकिन इस फीचर के जुड़ते ही इनकी कीमतों में ठीक-ठाक बढ़ोतरी होने वाली है। इस नए फीचर को टू-व्हीलर में इंटीग्रेट करने से लगभग 10 से 15 हजार रुपये कीमत बढ़ सकती है। अनुमानित रूप से सिंगल चैनल ABS की लागत 8-10 हजार है और डुअल चैनल के लिए लगभग 20 हजार के करीब खर्च होता है।
बिक्री पर पड़ेगा सीधा असर!
एकदम से गाड़ियों के दाम बढ़ने का असर मार्केट में भी देखने को मिलेगा। सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स से खबर मिलती है कि सरकार 1 जनवरी 2026 से सभी टू-व्हीकलर्स में ABS Mandate कर देगी। ऐसे होने से एंट्री लेवल बाइक की कीमत भी 10-12 हजार रुपये बढ़ सकती है और इसका असर बिक्री पर भी देखने को मिल सकता है।
क्या ABS से रुक जाएंगे एक्सीडेंट?
ऐसा कहना थोड़ा सा गलत होगा कि ABS को स्टैंडर्ड फीचर बनाने से दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाएं खत्म हो जाएंगी। हालांकि, इससे काफी हद तक एक्सीडेंट रोके जा सकते हैं। इसके साथ राइडर और पिलियन दोनों को हेलमेट पहनने व ट्रैफिक रूल्स को कड़ाई से पालन करने की जरूरत है, क्योंकि रोजमर्रा की राइडिंग में ABS से ज्यादा जरूरी है कि आपके पास राइडिंग गियर हों।


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