गियर डालने से लेकर बटन दबाते ही फर्राटा भरने तक, इंडियन मार्केट में कुछ ऐसा रहा स्कूटरों का सफर
Revolution of Scooters in India: डेली कम्यूटिंग के लिए सबसे बेहतर ऑप्शन के रूप में अभी भी स्कूटर को चुना जाता है। ऑफिस जाना हो, वर्किंग साइट या फिर कॉलेज-इंस्टीट्यूट, अभी भी कम दाम में अप-डाउन कराने के लिए Scooters को चुना जाता है।
एक समय था जब स्कूटर भी बाइक की तरह गियर के साथ आते थ। समय के साथ ये एडवांस हुए और इन्हें CVT ऑप्शन में पेश किया जाने लगा। तकनीक आगे बढ़ी, मार्केट में Electric Scooters का दबदबा शुरू हो गया। मौजूदा समय में ICE मॉडल के मुकाबले ई-स्कूटर ज्यादा खरीदे जाते हैं।
अपने इस लेख में हम आपके लिए स्कूटरों के आदि से लेकर अब तक की कहानी लेकर आए हैं। हम जानेंगे कि भारत का पहला स्कूटर कैसा था, इन्हें CVT के साथ पेश करना कब शुरू किया गया और स्कूटरों का इलेक्ट्रिफिकेशन कब हुआ। आइए Revolution of Scooters वाली इस स्टोरी पर एक नजर डालते हैं।

पहला मेड इन इंडिया स्कूटर
Bajaj Chetak देश का पहला स्कूटर था, जिसे 1972 में घरेलू बाजार के अंदर उतारा गया। ये इटालियन कंपनी पियाजियो के वेस्पा स्कूटर पर आधारित था, जिसके लाइसेंस के तहत बजाज ने इसे बनाया।
इसका नाम महाराष्ट्र के प्रसिद्ध योद्धा छत्रपति शिवाजी के घोड़े "चेतक" के नाम पर रखा गया था। उस समय बजाज चेतक को अपनी मजबूती, किफायती कीमत और मध्यम वर्ग की जरूरतों के लिए उपयुक्त होने के कारण खूब पसंद किया गया।

स्पेसिफिकेशन की बात करें, तो इसे 145.45 cc, 2-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड पेट्रोल इंजन के साथ पेश किया गया था। ये पावरट्रेन 7.5 bhp की शक्ति और 9.8 Nm टॉर्क प्रोड्यूस करने में सक्षम था। इसे मोटरसाइकिल की तरह 4-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलता था।
परफॉरमेंस पर नजर डालें, तो ये 80-85 किमी/घंटे की टॉप स्पीड के साथ लगभग 40-50 किमी/लीटर का माइलेज देने में सक्षम था। देश का पहला बजाज चेतक लगभग 103 किलोग्राम वजनी था और इसकी फ्यूल टैंक कैपेसिटी 6 लीटर (1.5 लीटर रिजर्व सहित) थी।

गियर्ड स्कूटर का युग
1960 और 1970 के दशक में भारत में स्कूटर के पर्यायवाची बजाज चेतक और लैम्ब्रेटा जैसे गियर्ड स्कूटर थे। ये स्कूटर टू-स्ट्रोक इंजन पर आधारित थे और मैनुअल गियर सिस्टम के साथ आते थे। इनका डिजाइन भी काफी सिंपल था।
हालांकि, गियर बदलने की प्रक्रिया और मेंटेनेंस ने इन्हें कुछ हद तक जटिल बनाए रखा। गियर्ड स्कूटर मजबूत और विश्वसनीय थे, लेकिन मौजूदा स्कूटरों के मुकाबले ये बहुत कम सुविधाजनक थे। हालांकि, मिडिल क्लास के लिए ये किफायती और सुलभ परिवहन साधन बने।

सीवीटी स्कूटर का आगमन
1990 के दशक के अंत और 2000 की शुरुआत में सीवीटी तकनीक ने स्कूटर मार्केट में क्रांति ला दी। CVT यानी कंटीन्यूअसली वैरिएबल ट्रांसमिशन ने गियर बदलने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया। Honda Activa और TVS Jupitor जैसे स्कूटरों ने भारतीय बाजार में इस तकनीक को काफी पॉपुलर बना दिया।
सीवीटी स्कूटर की सवारी आसान, सुगम और कम थकाऊ थी, जिसने इसे विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के बीच काफी पॉपुलर बनाया। इनका मेंटेनेंस भी कम था और ये बेहतर माइलेज देने में भी सक्षम थे।

इलेक्ट्रिक स्कूटर: भविष्य की ओर कदम
21वीं सदी के दूसरे दशक में सख्त हो रहे एमीशन नॉर्म और लगातार आसमान छू रहे फ्यूल प्राइस ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग को बढ़ाया है। बैटरी से संचालित होने वाले इन ई-स्कूटरों ने पारंपरिक पेट्रोल स्कूटरों की तुलना में लोगों की जिंदगी आसान किया है।
इलेक्ट्रिक स्कूटर में लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग होता है, जो जीरो एमीशन सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा, ये टचस्क्रीन डिस्प्ले, जीपीएस और मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी के साथ तमाम एडवांस फीचर्स से भी लैस हैं। मौजूदा समय में TVS iQube, Ola S1 Pro और Ather Rizta जैसे ई-स्कूटरों को आप एक सवा लाख की कीमत में खरीद सकते हैं।

सार: गियर्ड स्कूटर से लेकर सीवीटी और फिर इलेक्ट्रिक स्कूटर तक का सफर तकनीकी प्रगति और बदलते उपभोक्ता व्यवहार (Consumer behavior) को दर्शाता है। जहां गियर्ड स्कूटर ने विश्वसनीयता और सामर्थ्य प्रदान की, वहीं सीवीटी ने सुविधा और सरलता को बढ़ावा दिया।
मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक स्कूटर पर्यावरणीय स्थिरता और आधुनिकता का प्रतीक बन चुके हैं। जैसे-जैसे तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो रहा है, इलेक्ट्रिक स्कूटर भविष्य के शहरी परिवहन का आधार बनने की ओर अग्रसर हैं।


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