वार्डविजार्ड मोबिलिटी 650 करोड़ रुपये में लगाएगी बैटरी प्लांट, देश को बनाएगी ईवी सेल निर्माण का केंद्र
जॉय ई-बाइक्स ब्रांड के तहत दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता वार्डविजार्ड (WardWizard) मोबिलिटी भारत में लिथियम आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की तैयारी कर रही है। कंपनी गुजरात के वडोदरा में 650 करोड़ रुपये के निवेश से ईवी सेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और असेंबली प्लांट खोलने की योजना बना रही है। हिंदुस्तान टाइम्स ऑटो की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वार्डविजार्ड मोबिलिटी ने सिंगापुर आधारित ऊर्जा प्रबंधन फर्म सनकनेक्ट के साथ इस प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाया है।

कंपनी ने पीटीआई को बताया कि यह रिसर्च सेंटर अगले 18-20 महीनों में तैयार हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर बनाने में 75-125 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि लगभग 450 करोड़ रुपये कच्चे माल, मशीनों और असेंबली उपकरणों को खरीदने में खर्च किया जाएगा। कंपनी इस राशि को अपने निवेशकों से इकठ्ठा करेगी।

वार्डविजार्ड की बात करें तो कंपनी मौजूदा समय में हाई स्पीड और लो स्पीड, दोनों तरह के दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन बना रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 35,000 स्कूटरों की बिक्री की थी, वहीं डीलरों को करीब 1.5 यूनिट्स का डिस्पैच किया था। कंपनी की योजना चालू वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख से ज्यादा ई-स्कूटर बेचने की है। कंपनी इस साल जुलाई में पैसेंजर इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

कंपनी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में निवेश से उपकरण बनाने वाले स्थानीय वेंडरों को भी बढ़ावा मिलेगा। पेट्रोल वाहनों का बेहतर विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए प्रेरित होंगे जिससे मेक-इन-इंडिया के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।

परिवहन मंत्रालय के वाहन पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश 12 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पंजीकृत हैं। देश में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक कारों पर जीएसटी दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।

ऑटोमोबाइल और ऑटो घटकों के लिए घोषित 25,938 करोड़ रुपये के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना पांच साल के लिए लागू की गई है।

देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र सरकार ने 2015 में पैन-इंडिया आधार पर भारत में फास्टर मॉडुलेशन ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना की शुरूआत की थी। वर्तमान में, फेम योजना के दूसरे चरण को 1 अप्रैल, 2019 से पांच साल की अवधि के लिए लागू किया गया है, जिसमें कुल बजटीय सहायता 10,000 करोड़ रुपये है।

1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट में केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। हालांकि, बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम करने की घोषणा तो नहीं की गई है, लेकिन केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग नीति लो लागू करेगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन को बार-बार चार्ज किए बिना लंबा सफर करना आसान हो जाएगा।

इसके अलावा बजट में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति तैयार की गई है। इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन तैयार किए जाएंगे और सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन के लिए इंडस्ट्री डेवलप की जाएगी।


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