बाइक चलाते समय इस डिवाइस के इस्तेमाल पर लगा बैन, 3 महीने के लिए रद्द होगा ड्राइविंग लाइसेंस
सड़क पर लोगों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों में लगातार सुधार किये जा रहे हैं। हालांकि, जाने अनजाने में कई लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिसके वजह से उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ता है। हाल ही में ट्रैफिक नियमों में कुछ बदलाव किये गए हैं जिसके तहत अब बाइक चलाते समय ब्लूटूथ डिवाइस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब देश भर में ट्रैफिक पुलिस ब्लूटूथ/मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करने वाले बाइक चालकों पर जुर्माना लगा रही है।

क्यों है प्रतिबंध?
दरअसल, कई लोग बाइक चलाते समय कॉल रिसीव करने या गाना सुनने के आदि होते हैं। इसके लिए वह ब्लूटूथ/मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, जो घातक साबित हो सकता है। यातायात नियमों के तहत ड्राइविंग करते समय किसी भी तरह के मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। अब इसमें ब्लूटूथ जैसे हैंड्स फ्री डिवाइस को भी शामिल कर लिया गया है।

बाइक चलाते समय ब्लूटूथ डिवाइस के इस्तेमाल से सड़क पर ध्यान भटकने की संभावना रहती है। यह सड़क दुर्घटनाओं को आमंत्रण देता है। ड्राइविंग करते समय मोबाइल डिवाइस के इस्तेमाल से होने वाले हादसों को देखते हुए सरकार ने पहले ही इन्हें बैन कर दिया था। अब ब्लूटूथ हेडफोन जैसी नई तकनीक के आने से हादसों के मामलों में एक बार फिर इजाफा होने लगा है।

इतने का कट सकता है चालान
अगर आप बाइक चलाते हुए ब्लूटूथ/मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, तो यातायात कानून के अनुसार आप पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर आप बार-बार इन नियमों का उल्लंघन करते पाए गए तो ट्रैफिक पुलिस आपका ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए रद्द भी कर सकती है।

ठीक से हेलमेट न पहनने पर भी चालान
सही तरह से हेलमेट न पहनने पर भी आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है। लोग अक्सर हड़बड़ी में हेलमेट तो पहन लेते हैं लेकिन उसका स्ट्रैप नहीं लगाते, जो काफी खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आपने हेलमेट तो लगाया है लेकिन स्ट्रैप लॉक नहीं किया तो कभी भी हेलमेट आपके सर से बाहर निकल सकता है। इस तरह आपकी जान खतरे में पड़ सकती है और दूसरों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

सड़कों पर हर साल होते हैं इतने हादसे
भारत में सड़क हादसे हर साल मौतों, चोटों और संपत्ति के नुकसान का एक प्रमुख स्रोत है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत में सड़क हादसों में 1,55,622 मौतें हुईं, जो 2014 के बाद से सबसे ज्यादा हैं। मरने वालों में 69,240 लोग दोपहिया वाहन चालक थे। आंकड़ों को देखें तो भारतीय सड़कों पर हर दिन 426 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल देश भर में 4.03 लाख सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के अलावा 3.71 लाख लोग घायल भी हुए। आंकड़ों के अनुसार, 2020 में, कोविड-19 लॉकडाउन के वर्ष, देश में 3.54 लाख सड़क दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 1.33 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि अन्य 3.35 लाख घायल हुए।

एनसीआरबी ने 2021 की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि बस जैसे सार्वजनिक परिवहन साधन बाइक जैसे निजी वाहनों की तुलना में अधिक सुरक्षित थे। आंकड़ों से पता चला है कि सड़क दुर्घटनाओं में हुई कुल मौतों में से 44.5 फीसदी दोपहिया वाहन सवार थे, इसके बाद कार (15.1 फीसदी), ट्रक या लॉरी (9.4 फीसदी) और बसें (3 फीसदी) थे।


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