जितेंद्र ईवी कर रही है 1,000 करोड़ रुपये का निवेश, प्रति वर्ष 20 लाख ई-स्कूटर बनाने का है लक्ष्य
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। भारत के ई-वाहन बाजार में दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग सबसे ज्यादा है।
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आंकड़ों को देखें तो देश में 14 लाख से ज्यादा ई-वाहन पंजीकृत हैं, इनमें 5 लाख से ज्यादा दोपहिया ई-वाहनों की संख्या है। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के चलते अब कई कंपनियां बाजार में उतर गई हैं।

इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनी जितेंद्र ईवी (Jitendra EV) इलेक्ट्रिक स्कूटरों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विस्तार कर रही है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि वह 2027 से अपनी उत्पादन क्षमता को 20 लाख यूनिट तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। मौजूदा समाय में कंपनी अपनी नासिक स्थित फैक्ट्री में सालाना 24,000 यूनिट इलेक्ट्रिक स्कूटर बना रही है।

जितेंद्र ईवी के को-फाउंडर, जितेंद्र शाह ने बताया कि कंपनी कुछ नए इलेक्ट्रिक स्कूटर मॉडल पर काम कर रही है। इन स्कूटरों को तेजी से चार्ज होने वाले लिथियम टाइटेनियम ऑक्साइड बैटरी के साथ लाया जाने वाला है। कंपनी इन बैटरियों को बेंगलुरु स्थित सेल निर्माता लॉग9 (Log9) से खरीद रही है। उन्होंने बताया कि ये स्कूटर फिलहाल अपने टेस्टिंग मॉडल में है।

जितेंद्र के अनुसार, कंपनी हर महीने लगभग 1,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर बेच रही है। कंपनी को हाल ही में बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप एफएई बाइक्स से 12,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर डिलीवर करने का आर्डर मिला है। जितेंद्र का कहना है कि कंपनी इस आर्डर को पूरा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है।

जितेंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार में 100 करोड़ रुपये का निवेश किया है, लेकिन अगले 5 वर्षों में, 2 मिलियन यूनिट की सुविधा स्थापित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है। कंपनी नए रिटेल स्टोर को खोलकर बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। कंपनी फिलहाल 170 डीलरशिप का संचालन कर रही है जिसे अगले वर्ष 300 और 2027 तक 700 तक करने की योजना है।

मौजूदा समय में पेट्रोल वाहनों पर 48 प्रतिशत के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी केवल 5 प्रतिशत है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिथियम की अधिक कीमत ने इलेक्ट्रिक वाहनों की लगत को बढ़ा दिया है लेकिन भविष्य में लिथियम के ज्यादा उत्पादन से कीमत में कमी आएगी। इसकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत में भी गिरावट देखने को मिलेगी।

वर्तमान में भारत की लिथियम बैटरी की 81 प्रतिशत आवश्यकता स्थानीय उत्पादकों द्वारा पूरी की जा रही है। वैकल्पिक बैटरी प्रौद्योगिकियों के विकास के संबंध में अनुसंधान चल रहा है और इस क्षेत्र में जल्द ही सफलता हाथ लगने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार 2030 तक निजी कारों के लिए 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक कारों के लिए 70 प्रतिशत, बसों के लिए 40 प्रतिशत और दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की उम्मीद कर रही है।


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