सरकार खरीद रही पुराने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, जाने क्या है वजह
सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल की सब्सिडी में हो रहे घोटाले का पता लगाने के लिए कमर कस ली है। इसकी जांच के लिए अब वह नए-नए तरीके अपना रही है। इसी दिशा में भारी उद्योग मंत्रालय के कहने पर, दर्जनों इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ग्राहकों से वापस खरीदा गया है। इसका मकसद सरकार ने जो स्थानीकरण नियम लागू किए थे उसका ईवी निर्माताओं द्वारा हुए उल्लंघन का पता लगाना है।

दरअसल सरकार की प्रमुख ईवी-प्रमोशन योजना, फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक (फेम-II) के तहत वाहन के पार्ट्स और कंपोनेंट का निर्माण स्थानीय रूप से किया जाना जरूरी है। बता दें फेम-II के तहत कंपनियों को 10,000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का लाभ मिलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक इसकी टेस्टिंग ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, पुणे और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, मानेसर कर रहे हैं। यह जानकारी जिसने दी है उसने नाम न छापने की शर्त पर यह सब बताया है। उन्होंने कहा कि जब कंपनियों द्वारा बेचे गए दोपहिया वाहनों के पार्ट्स को अलग किया जाएगा तो सच सामने आ सकता है।

सरकार लोगों से इलेक्ट्रिक वाहन वापस मांगा कर यह पुख्ता करना चाहती है कि सब्सिडी के साथ बेचे जाने वाले वाहन में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट स्थानीय रूप से गाइडलाइन के मुताबिक लगाए गए हैं या फिर बाहर से आयात करके लगाए गए हैं।

इस टेस्टिंग में उन सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माताओं की कई यूनिट्स शामिल हैं, जिन्होंने फेम-II योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाया है । टेस्टिंग के लिए वाहनों को विभिन्न शहरों से रैडम तरीके से चुना जाता है और ग्राहकों को स्कूटर खरीदने का मकसद बताकर उनसे स्कूटर खरीद ली जाती है।

बता दें कि हाल ही खबर आई थी कि सरकार ने हीरो इलेक्ट्रिक और ओकिनावा कंपनी को सब्सिडी लाभ देने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है और भारी उद्योग मंत्रालय ने इनके वाहने में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों की जांच के लिए नोटिस भेजा है। ये दोनों एक महीने में लगभग 17,000 यूनिट बेचते हैं।

वहीं हीरो इलेक्ट्रिक और ओकिनावा के पहले, ग्रीव्स कॉटन के एम्पीयर, रतन इंडिया की रीवोल्ट, ओकाया और जितेंद्र ईवी जैसी इलेक्ट्रिक स्कटूर बनाने वाली कंपनियों को भी ऐसे ही ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की तरफ से एक ऑडिट का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं रिवोल्ट, एम्पीयर, ओकाया और जितेंद्र संयुक्त रूप से हर महीने 10,000-11,000 यूनिट बेचते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एआरएआई की टेस्टिंग का पहला दौर सितंबर के पहले सप्ताह में हुआ था और दूसरा दौर जो 30 सितंबर को शुरू हुआ था अभी तक चल रहा है।


Click it and Unblock the Notifications








