गुजरात में WardWizard लगाएगी इलेक्ट्रिक व्हीकल प्लांट, 500 करोड़ रुपये का किया निवेश
जॉय ई-बाइक ब्रांड के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की निर्माता WardWizard इनोवेशन एंड मोबिलिटी लिमिटेड ने गुजरात में 500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए गुजरात सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास को बढ़ावा देना और राज्य में हरित गतिशीलता को मजबूत करने के लिए सरकार का समर्थन करना है।

गांधीनगर में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2022 के दौरान दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। साझेदारी के तहत, WardWizard इलेक्ट्रिक दो और तीन पहिया वाहनों के अनुसंधान और विकास में निवेश करने के साथ, अपनी वडोदरा सुविधा में मोटर असेंबली की स्थापना करेगा और कच्चे माल के निर्माण के लिए सहायक उपकरण विकसित करेगा। इस पहल से राज्य में 6,000 से अधिक नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

कंपनी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में निवेश से उपकरण बनाने वाले स्थानीय वेंडरों को भी बढ़ावा मिलेगा। पेट्रोल वाहनों का बेहतर विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए प्रेरित होंगे जिससे मेक-इन-इंडिया के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।

बता दें कि गुजरात में इसी साल अक्टूबर में 'गो ग्रीन' योजना शुरू की गई है। जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, ईंधन के बिल को कम करने और वाहनों के उत्सर्जन पर अंकुश लगाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का समर्थन करना है।

योजना के तहत राज्य के निर्माण और औद्योगिक श्रमिकों को रियायती दर पर बैटरी से चलने वाले दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। संगठित क्षेत्र का कोई भी श्रमिक इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत पर 30 प्रतिशत या 30,000 रुपये की सब्सिडी, जो भी कम हो, का लाभ उठा सकता है। निर्माण क्षेत्र में श्रमिकों के लिए सब्सिडी का एक अलग मानदंड हैं, वे बैटरी से चलने वाले दोपहिया वाहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी या 30,000 रुपये की छूट, जो भी कम हो, का लाभ उठा सकते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले श्रमिकों को वाहन रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स पर भी एक बार के लिए छूट दी जाएगी। 'गो ग्रीन' योजना के प्रारंभिक चरण में, राज्य सरकार 1,000 निर्माण श्रमिकों और 2,000 संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बैटरी से चलने वाले ऐसे दोपहिया वाहन उपलब्ध करा रही है।

इस योजना के तहत केवल सरकार द्वारा अनुमोदित और स्थानीय रूप से निर्मित वाहनों को ही पात्र माना जाएगा। राज्य सरकार की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस योजना के तहत दिए जाने वाले इलेक्ट्रिक वाहन एक बार चार्ज करने में 50 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम हाई-स्पीड मॉडल होंगे।

बता दें कि केंद्र सरकार की फेम-2 (Fame-2) स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स को समाप्त कर दिया गया है। अब इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहक रजिस्ट्रेशन शुल्क की बचत कर सकते हैं।

केंद्र सरकार के साथ कई राज्य सरकारें भी अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों के तहत बैटरी से चलने वाले वाहनों के रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दे रही हैं।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों पर जीएसटी दर (GST Rate) को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी सब्सिडी और छूट देकर इलेक्ट्रिक वाहनों के उतपादन और बिक्री को प्रोत्साहित कर रही हैं।


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