दोपहिया वाहन बाजार पर पड़ी महंगाई की मार, नवंबर 2021 में 35% कम होगा उत्पादन
भारत में दोपहिया वाहन निर्माता अक्टूबर 2021 की तुलना में नवंबर 2021 में अपने उत्पादन में 20 से 35 फीसदी की कटौती कर रही हैं। इस बार का त्योहारी सीजन ग्राहकों को आकर्षित करने में नाकाम रहा जिसके वजह से वाहन कंपनियों के पास भारी मात्रा में बिना बिकी हुई इन्वेंटरी बची हुई है। इस कारण वाहन कंपनियों को उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

वाहन कंपनियों को आशंका है कि मांग में कमी चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक बनी रहेगी जिसकी वजह से टू-व्हीलर मार्किट सिकुड़ जाएगा। इसके साथ चालू वित्तीय वर्ष में दोपहिया वाहन निर्माताओं को लगातार तीसरे साल भी नुकसान उठाना पड़ेगा। संभावित उत्पादन योजना इस महीने 1.35 से 1.40 मिलियन यूनिट्स रहने का अनुमान है। यह 2012 के बाद से नवंबर में सबसे कम उत्पादन होगा। 2012 में टू-व्हीलर वाहनों का उत्पादन 1.27 मिलियन यूनिट था।

भारत की सबसे बड़ी बाइक निर्माता, हीरो मोटोकॉर्प ने सितंबर-तिमाही के नतीजों पर कहा कि मानसून में देरी और कटाई के कारण त्योहारी सीजन की बिक्री में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी आर्थिक संकेतकों का हवाला देते हुए आगामी शादियों के मौसम में मांग में सुधार की उम्मीद कर रही है।

एक रिपोर्ट में, टीवीएस मोटर के प्रवक्ता ने कहा कि त्योहारों के दौरान दोपहिया वाहनों की मांग में नरमी देखी गई। प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो वर्षों में कीमतों में 40% से अधिक की वृद्धि ने ग्रामीण और शहरी भारत में कई संभावित ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित किया है।

रेटिंग फर्म ICRA ने कहा कि सुस्त बिक्री और डीलरशिप पर उच्च इन्वेंट्री को देखते हुए, वित्त वर्ष 22 के बाकी हिस्सों में थोक मात्रा में मामूली सुधार हो सकता है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान पेट्रोल की कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि ने उपभोक्ताओं को डीलरशिप से दूर रखा। ग्रामीण इलाकों में मांग शहरी क्षेत्रों से भी कम रही। संभवत: असमान मानसून और फसल कटाई में देरी के कारण कृषि क्षेत्र में नरमी आई है।

ICRA ने कहा कि कम आय वाले लोगों वाहनों में निवेश को लेकर सतर्कता बारात रहे हैं। नौकरी छूटने, वेतन में कटौती और सीमित वेतन वृद्धि के कारण आय की अनिश्चितता बढ़ी है, जबकि कोविड से संबंधित चिकित्सा व्यय और दोपहिया वाहन स्वामित्व की आसमान छूती लागत का सामना करना पड़ रहा है।

ICRA के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में हालिया कटौती, आगामी शादी के मौसम और यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य जैसे श्रम-केंद्रित क्षेत्रों के खुलने से मांग में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष में ही सार्थक वृद्धि देखी जा सकती है।


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