बाइक चलाते हैं तो जान लें ये नए नियम, अब ऐसे करनी होगी बाइक की सवारी
बीते कुछ साल में सड़क सुरक्षा के नियमों को सख्त करने पर जोर दिया गया है। सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों में सुधार करते हुए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम (1989) में संशोधन किया था। इसी कानून के तहत अब मंत्रालय ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए कुछ नए नियम लागू किये हैं। नए नियमों के मुताबिक, बाइक चलाने वाले के पीछे बैठने वाले लोगों को कुछ नए नियमों का पालन करना होगा। आइए जानते हैं कि इन नए नियमों में क्या कहा गया है।

बाइक के पीछे होना चाहिए हैंडहोल्ड
दोपहिया वाहनों से जुड़े नए नियमों के मुताबिक, अब बाइक के पीछे की सीट में हैंडहोल्ड का होना जरूरी है। हैंडहोल्ड पीछे की सीट में बैठने वाले की सुरक्षा के लिए दिया जाता है। बाइक चालक के अचानक ब्रेक लगाने के समय पीछे के राइडर के लिए हैंडहोल्ड बेहद मददगार होता है। अधिकतर स्पोर्ट बाइक्स में हैंडहोल्ड की सुविधा नहीं दी जाती है। हालांकि, नए नियमों के लागू होने के बाद अब सभी तरह की बाइक में हैंडहोल्ड अनिवार्य कर दिया गया है।

बाइक में पायदान और साड़ी गार्ड भी हुआ अनिवार्य
बाइक में पीछे बैठने वाले राइडर के लिए दोनों तरफ पायदान अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा बाइक में साड़ी गार्ड को लगाना भी जरूरी होगा। बाइक कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि बाइक के पिछले पहिये के बाएं तरफ का कम से कम आधा हिस्सा सुरक्षित तरीके कवर होना चाहिए। यह इसलिए ताकि पीछे बैठने वाले के कपड़े पहिये में ना फसें।

बाइक में हल्का कंटेनर लगाने की छूट
नए नियमों में परिवहन मंत्रालय ने बाइक में हल्का कंटेनर लगाने की छूट दी है। कंटेनर लगवाने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किये गए हैं, जिसके अनुसार कंटेनर की लंबाई 550 मिमी, चौड़ाई 510 मिली और ऊंचाई 500 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर कंटेनर को पिछली सवारी के स्थान पर लगाया जाता है तो सिर्फ ड्राइवर को ही बाइक पर बैठने की मंजूरी होगी। यानी कंटेनर लगे बाइक पर दूसरी सवारी को बैठाने की इजाजत नहीं होगी। अगर दूसरी सवारी बाइक पर बैठती है तो नियम का उल्लंघन माना जाएगा।

टायर के लिए लागू हुए नए गाइडलाइन
सरकार ने टायर के लिए भी नए नियम लागू किये हैं। इन नियमों के अनुसार, अधिकतम 3.5 टन के वाहनों के लिए टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम का सुझाव दिया गया है. इस सिस्टम में सेंसर के जरिये ड्राइवर को जानकारी मिलती है कि गाड़ी के टायर में हवा का प्रेशर कितना है। इसके साथ ही कंपनियों को निर्देश दिए गया है कि वे गाड़ियों के साथ मरम्मत किट भी दें। इसके लागू होने के बाद गाड़ी में एक्स्ट्रा टायर की जरूरत नहीं होगी।

केंद्र सरकार ने लागू की वाहन स्क्रैपिंग नीति
केंद्र सरकार ने पिछले दिनों देश में वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी को लागू किया है। स्क्रैपिंग पॉलिसी के अनुसार तय समय सीमा पार कर चुके प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को स्क्रैप किया जाएगा। स्क्रैपिंग नीति के तहत पुराना वाहन स्क्रैप कराने वाले लोगों को नए वाहन की खरीद पर छुट और सब्सिडी देने की घोषणा की गई है।

स्क्रैपिंग पॉलिसी नए वाहनों को 40% तक सस्ता बनाएगी, क्योंकि पुरानी गाड़ियों से निकलने वाले कबाड़ से 99% मेटल को रिकवर किया जा सकता है। इससे वाहनों की लागत कम होगी। वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी ऑटोमोबाइल कंपनियों, उससे जुड़े कारोबारियों, वाहन ग्राहकों और पर्यावरण, सभी के लिए फायदेमंद हैं। इस पॉलिसी से भारत में बनने वाली नई गाड़ियों की कीमत 40% तक कम होगी, साथ ही ईंधन और मेंटेनेंस कॉस्ट में बचत जैसे कई फायदे होंगे।

स्क्रैपिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तो रोजगार का भी सृजन होगा और नौकरियां बढ़ेंगी। वहीं नए वाहनों की सेल से सरकार को GST के तौर पर 30 से 40 हजार करोड़ रुपये का रिवेन्यू आएगा।


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