केंद्र ने दी राहत! अब इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के कमर्शियल उपयोग के लिए नहीं होगी परमिट की जरूरत
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport) ने देश में इलेक्ट्रिक, इथेनॉल और मेथनॉल से चलने वाले वाहनों को बड़ी राहत दी है। दरअसल, मंत्रालय ने इन वाहनों को परमिट (Permit) लेने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। यानी इन वाहनों को अब बिना परमिट लिए किसी भी तरह से इस्तेमाल किया जा सकेगा। कानूनी तौर पर इन वाहनों को कमर्शियल इस्तेमाल किया जा सकेगा। मंत्रालय के इस फैसले से टूरिज्म इंडस्ट्री को भी राहत होगी।

किराए पर दोपहिया वाहन चलाने वालों को होगी सुविधा
सड़क परिवहन मंत्रालय ने बैट्री, मेथनॉल और एथेनॉल से चलने वाले दो पहिया वाहनों को परमिट की आवश्कता से मुक्त कर दिया है। हालांकि, मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों को पहले ही परमिट से छूट दे रखी थी, लेकिन आदेश में स्पष्ट निर्देश नहीं दिए थे। जिस वजह से दोपहिया वाहन ट्रांसपोर्टर इन वाहनों को किराये पर कानूनी रूप में नहीं दे पा रहे थे। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार कानूनी रूप में बगैर परमिट के दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे सबसे बड़ा फायदा किराये पर दोपहिया वाहन देने वाले ट्रांसपोर्टरों को होगा।

इस संबंध में बस एंड कार ऑपरेटर्स कंफेडेरशन ऑफ इंडिया (CMVR) के चेयरमैन गुरुमीत सिंह तनेजा का कहना है कि सड़क परिवहन मंत्रालय के इस फैसले से दोपहिया वाहनों को राहत होगी और टूरिस्ट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को फायदा होगा। बता दें कि गोवा व अन्य टूरिज्म प्लेस में दोपहिया वाहन किराये पर दिए जाते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिली रोड टैक्स से छूट
एक अन्य फैसले में मंत्रालय ने बैटरी से चलने वाले सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल शुल्क से मुक्त कर दिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत कम होगी जिससे लोग इन्हे खरीदने में दिलचस्पी दिखाएंगे। केंद्र सरकार की तरफ से यह फैसला तब आया है जब देश भर में ईंधन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री है धीमी
इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित करने की कई नीतियों के बावजूद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तुलनात्मक रूप से कम है। इसका बड़ा कारण देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और लोगों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज को लेकर उलझन को माना जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने पिछले कुछ सालों से देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी से विकास किया है। इसके लिए सरकार निजी कंपनियों और वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर काम कर रही है। केंद्र सरकार फेम-2 (FAME-2) स्कीम की मदद से इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाले रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर छूट दे रही है ताकि इन्हे ग्राहकों के लिए किफायती बनाया जा सके।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों पर जीएसटी दर (GST Rate) को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी सब्सिडी और छूट देकर इलेक्ट्रिक वाहनों के उतपादन और बिक्री को प्रोत्साहित कर रही हैं।

कितने बिके इलेक्ट्रिक वाहन?
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की बात करें तो, वित्तीय वर्ष 2020 में कुल 2,95,497 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए थे। वहीं, वित्तीय वर्ष 2021 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 19 फीसदी गिर कर 2,38,120 यूनिट रह गई। देश भर में कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए के लॉकडाउन के कारण बिक्री प्रभावित हुई।


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