FAME-II सब्सिडी के बाद हर हफ्ते बिक रहे 5,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया - केंद्र सरकार
भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री काफी बढ़ गई है। सरकार देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए FAME-II योजना को फिर से तैयार करने का श्रेय देती है। भारी उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को दावा किया है, इस साल जून में FAME-II योजना के रीमॉडलिंग के बाद, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री बहुत ज्यादा बढ़ी है।

मंत्रालय का कहना है कि FAME-II योजना लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री प्रति सप्ताह 700 यूनिट से बढ़कर 5,000 यूनिट से अधिक हो गई है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय की योजना घोषित की थी।

इस परिव्यय के साथ ही सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग (FAME) योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की थी। सरकार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को अग्रिम सब्सिडी प्रदान करती है और इस योजना के तहत ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाती है।

जून 2021 में केंद्र सरकार ने विशेष रूप से Covid-19 महामारी के दौरान अनुभव और ऑटो उद्योग और उपयोगकर्ताओं से प्रतिक्रिया के आधार पर FAME-II योजना को फिर से डिजाइन किया था। सरकार का दावा है, नई FAME-II योजना का उद्देश्य अग्रिम लागत को कम करके इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से प्रसार करना है।

सरकार ने यह भी कहा कि साल 2021 में अब तक 16 दिसंबर तक कुल 1.4 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया गया है। केंद्र सरकार की FAME-II योजना के तहत इन इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवंटित प्रोत्साहन राशि लगभग 500 करोड़ रुपये रखी गई है।

इन प्रोत्साहन वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में 1.19 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, 20.42 हजार इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 580 इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर भी शामिल हैं। सरकार का यह भी दावा है कि अब तक FAME-II के तहत कुल 1.85 लाख यूनिट इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया गया है।

आपको बता दें कि कई कारणों से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की मांग पिछले साल से बढ़ रही है। इनमें पेट्रोल और डीजल जैसे मोटर ईंधन की उच्च लागत, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के बजाय व्यक्तिगत गतिशीलता के लिए प्राथमिकता और महामारी के डर के कारण साझा गतिशीलता शामिल है।

इसके अलावा, भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर विकल्पों की बढ़ती संख्या, ईवी के प्रति उपभोक्ताओं की धारणा में बदलाव, राज्य सरकारों की ईवी नीतियों से अतिरिक्त लाभ भी खरीदारों को पारंपरिक ICE-संचालित दुपहिया वाहन की जगह पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक शीर्ष तीन राज्यों के रूप में उभरे हैं। कुछ समय पहले ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में अब तक 8,70,141 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है।

उन्होंने बताया था कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2,55,700 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। वहीं इसके बाद दिल्ली में 1,25,347 यूनिट और कर्नाटक में 72,544 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण किया गया है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य के लिए बहुत अच्छा है।

शीर्ष पांच राज्यों में, बिहार 58,014 वाहन और महाराष्ट्र 52,506 वाहनों के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर रहा। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र सरकार ने 2015 में भारत में 'फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, यानी FAME योजना की शुरूआत की थी।


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