बुलेट सवार पर हुआ 35,000 रुपयें का जुर्माना, साइलेंसर से निकल रही थी पटाखे जैसी तेज आवाज
देश भर में 1 सितंबर से संषोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद पुलिस के द्वारा भारी चालान कटाने के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस यातायात नियम तोड़ने वालों पर भरी जुर्माना लगा रही है।

दिल्ली के पास फरीदाबाद से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमे पुलिस ने रॉयल एनफील्ड बुलेट के मालिक पर हेलमेट न पहनने और तेज आवाज वाला साइलेंसर लगवाने के कारण बाइक वाले पर 35,000 रुपयें का भारी जुर्माना चस्पा कर दिया। कहा जा रहा है कि उस समय ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिस के कुछ आला अफसरों ने यह जुर्माना लगाया है।

उस समय बाइक पर तीन लोग सवार थे और पटाखे की आवाज निकालते हुए बुलेट से तेज रफ्तार में आगे बढ़ रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि रास्ते में ट्रैफिक पुलिस उनका इंतजार कर रही है। पकड़े जाने के बाद पुलिस ने बाइक चालक को कई ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए जुर्माना लगाया।

चालक बाइक पर ट्रिपल राइडिंग कर रहा था साथ में हेलमेट भी नहीं पहना था जिसके कारण पुलिस ने उसे देखते की पकड़ लिया। जब तफ्तीश की गई तो पता चला कि चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस और बाइक के रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेज भी नहीं है।

चालक के पास थर्ड पार्टी इंश्योरेंस और नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी नहीं था। इसके साथ ही बाइक की साइलेंसर को भी मॉडिफाई किया गया था जिससे पटाखे जैसी तेज आवाज निकल रही थी।

मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस ने बाइक के मालिक पर कुल मिलाकर 35,000 रुपयें का चालान ठोंक दिया। चालक की बाइक भी पुलिस ने जब्त कर ली और पूरा फाइन भरने के बाद ही छोड़ने की बात कही है।

हालांकि पुलिस ने ये भी कहा है कि अगर बाइक मालिक सम्बंधित दस्तावेजों को जमा करेगा तो जुर्माने में कुछ माफी मिल सकती है।

संषोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद ऐसे कई अन्य मामले सामने आए हैं जहां लोगों पर ट्रैफ़िक उल्लंघन के लिए हजारों रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

बदलाव बहुत तेजी से आया है, जिससे लोगों को नए यातायात नियमों का पालन करने के लिए बहुत कम समय मिला है। नियम केवल वाहन से जुड़े सही दस्तावेज प्राप्त करने के बारे में नहीं है, बल्कि पुरानी आदतों और माइंडसेट को बदलने के बारे में भी है, जिसमें कुछ समय लग सकता है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
बेहतर होता कि जुर्माने को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता । एक बार में जुर्माना बढ़ाने के बजाय हर साल 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती थी। इससे लोगों को नए नियमों का पालन करने के लिए अधिक समय मिल जाता और भरी-भरकम जुर्माने की समस्या से बचा जा सकता था।


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