गुजरात सरकार ने दी दोपहिया चालकों को छूट, अब शहरी इलाकों में हेलमेट लगाना नहीं होगा अनिवार्य
गुजरात राज्य के ट्रांसपोर्ट मंत्री, आर सी फाल्दू ने कहा है कि अब शहर के अंदर दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना वैकल्पिक होगा।

हालांकि राजमार्ग और गांव की सड़कों का उपयोग करने वालों को हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। हेलमेट की छूट केवल नगर निगम और नगर पालिका सीमा के अंदर लागू होगी।

परिवहन मंत्री का कहना है कि शहर के अंदर हेलमेट की अनिवार्यता को हटाने के लिए उन्हें लोगों के कई अनुरोध आ रहे थे, जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

अब गुजरात पुलिस शहर की सीमा के भीतर बिना हेलमेट वाले दोपहिया वाहन चालकों को नहीं पकड़ेगी। परिवहन मंत्री के अनुसार, शहरों के भीतर दो पहिया वाहन चालक लंबी दूरी तय नहीं करते हैं, जिससे दुर्घटना संभावना बेहद कम होती है।

बता दें की गुजरात में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत बढ़ाई गई जुर्माने की राशि का लोगों ने कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने प्रस्तावित जुर्माना राशि में भारी कटौती की थी।

गुजरात पहला राज्य है जहां पिलियन राइडर को हेलमेट न लगाने की छूट दी गई है। नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत बाइक चालक और पिलियन राइडर को हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

यह वैश्विक मानदंड है जो दो पहिया दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली सिर की चोटों से राइडर और पिलियन के जीवन की सुरक्षा के लिए है। सिर की चोट दो पहिया सवारों के दुर्घटनाओं में जान गंवाने का सबसे बड़ा कारण है।

परिवहन समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है और इसका मतलब है कि राज्य (उनकी विधानसभाओं के माध्यम से) मोटर वाहन अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन कर सकते हैं।

इस तरह गुजरात सरकार नागरिकों की अनुचित मांगों को पूरा करने के लिए मोटर वाहनों के अधिनियम में बदलाव करने में सक्षम हो गई है। इससे लोगों की सुरक्षा की पूरी तरह से अवहेलना हो रही है।

यातायात नियम लोगों की सुरक्षा के लिए होते हैं जिसमे छूट देना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। नए मोटर वाहन अधिनियम में यातायात नियमों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई संशोधन किए थे, लेकिन कई राज्य सरकारों ने लोगों के दबाव में आकर अधिनियम में परिवर्तन किया है। कहीं जुर्माने की राशि को घटा दिया गया है तो कहीं हेलमेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।


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