पोंगल के रंग में #WeGo के संग तमिलनाडु की सैर
टीवीएस वीगो वह स्कूटर है, जो खास कर युवाओं और ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स के लिये बनी है। स्टाइलिश लुक, बेहतरीन रंग और स्कूटर की डिजाइन वाकई में दिल को छू लेने वाली है। टीवीएस वीगो पर भारत के कई त्योहारों को देखने के बाद अब समय आ गया है एक जोखिम भरे रास्ते पर निकलने का। या ऐसा कहें कि प्रसिद्ध पोंगल त्योहार पर टीवीएस वीगो पर सवार हो असली भारत को देखने का मौका है, जो कृषि के रूप में गांवों में बसती है।

तो इसके लिए हमने चुना है तंजावुर। आपको बता दें कि तंजावुर दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण शहर है और अपनी धार्मिकता, कला और निर्माण के लिए जाना जाता है। इतना ही नहीं तंजावुर को भारत का चावल का कटोरा भी कहा जाता है। तंजावुर में कई चीजें हैं देखने लायक और शहर को समझने का सबसे अच्छा तरीका है टीवीएस वेगो पर सवार होकर घूमना। तो हम भी निकल पड़े वेगो पर सवार होकर तंजावुर घूमने। तो आईए वेगो की सवारी की पूरी कहानी आपको बताते हैं।

सफर की शुरुआत तंग गलियों से हुई। टीवीएस वेगो को भीड़भाड़ वाली गलियों में भी हैंडल करना बेहद आसान था। तंग गलियों से होते हुए हम प्रसिद्ध मंदिर बृहदेश्वर गए और तंजायी पेरिया को अच्छे से जानने का मौका मिला।

राजाराज चोल - I इस मंदिर के प्रवर्तक थे। यह मंदिर उनके शासनकाल की गरिमा का श्रेष्ठ उदाहरण है। राजाराज चोल- I के शासनकाल में यानि 1010 एडी में यह मंदिर पूरी तरह तैयार हुआ और वर्ष 2010 में इसके निर्माण के एक हजार वर्ष पूरे हो गए हैं। मंदिर का कुंभम् (कलश) जोकि सबसे ऊपर स्थापित है केवल एक पत्थर को तराश कर बनाया गया है और इसका वज़न 80 टन का है। निर्माण कार्य बिल्कुल वैसा ही जैसा टीवीएस वीगो का। जी हां संतुलन के मामले में।

अर्थ व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है कृषि इसलिए पोंगल के लिए हमने खेतों की तरफ रुख किया। आपको बता दें कि पोंगल को फसलों का त्योहार भी कहा गया है। किसान पोंगल का त्योहार मनाने के लिए तैयार थे। पोंगल तमिल के लोगों का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है जिसमें वो अपनी मूल संपत्ति (कृषि) को दिखाते हैं।

पोंगल पर्व चार दिन का फसल की कटाई का उत्सव है। इस उत्सव को वहां के लोग जिस तरह मनाते हैं उसे शब्दों में बंया कर पाना संभव नहीं है। तमिल में पोंगल को थाई पोंगल के नाम से भी जाना जाता है। पोंगल पर्व का दिन बहुत शुभ माना जाता है और ये बहुत हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

उत्सव के दौरान किसान अपने खेतों पर खासा ध्यान रखते हैं। फसलों को सम्मान देते हैं और अच्छे भविष्य की कामना करते हैं। वहीं घर के सदस्य घरों को रंगते हैं। खास बात ये है कि वो ऐसा कोई भी मशीन प्रयोग नहीं करते जिससे शोर हो।

ऊंची-ऊंची इमारतों से दूर और शोरगुल वाले ट्रैफिक से निजात पाकर टीवीएस वीगो को बिल्कुल घर जैसा महसूस हुआ। वीगो में किसानों जैसी शक्ति देखने को मिली।

गांवों की सड़कों पर चलने के लिए टीवीएस वीगो का टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंसन खासा मददगार होता है। सिंक ब्रेक सिस्टम दोनों ब्रेक पर अप्लाई है। इसके चलते कोई भी ब्रेक दबाने पर संतुलन नहीं बिगड़ता है।

पूरे दिन शहर घूमने के बाद अब समय आया रुक कर यह देखने का कि किसान किस तरह कठीन परिश्रम करने के लिए खुद को तैयार करते हैं।

बने रहिये हमारे साथ इस उत्साह भरी सैर का दूसरा भाग पढ़ने के लिये। क्योंकि #WeGo के संग हम तमिलनाडु को और अच्छे से जानेंगे।

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