TVS #Wego के संग देखी पुणे में दीवाली की रौनक
दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बेहद रोमांचक और सुखद अनुभव के बाद हमारा अगला पड़ाव बना पुणे। वो भी रौशनी के त्योहार दीवाली पर। पुणे इसलिये क्योंकि इसे हम सभी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जानते हैं। यहां भी हमने अपने TVS #Wego को अपने हमसफर के रूप में चुना।
पढ़ें- TVS #WeGo के संग कोलकाता की सैर का मजा — भाग 1
पढ़ें- TVS #Wego से रात-दिन कोलकाता की सैर — भाग 2

बचपन में हमारे लिये दीवाली का मतलब होता था, लंबी छुट्टियां, धूम-धड़ाम करने वाले पटाखे और ढेर सारी मिठाईयां। अगर 90 के दशक की ओर मुड़ कर देखें तो मेरे पिता स्कूटर बजाज चेतक पर सवार होकर बाजार जाते थे और ढेर सारी मिठाईयां, पटाखे, आदि हमारे लिये लाते थे। मोहल्ले में स्कूटर की एंट्री होते ही मैं और मेरे दोस्त दौड़ पड़ते थे। जब पड़ोसियों को मिठाईयां खिलाने का सिलसिला जारी होता था, तब मेरे मन में एक ही बात रहती थी, "जल्दी पटाखे जलाने का समय आये!"

इस मौके पर सड़कें रौशनी में नहायी हुई दिखती थीं, और आज भी दिखती हैं। मकानों पर रंग-बिरंगी लाइटें, मन को मोह लेने वाली होती हैं। यह त्योहार भी एकता और भाईचारे का त्योहार है, जो लोगों को करीब लाता है। आपके दिल में आज भी आपके बचपन की यादें ताजा होंगी। मुझे अच्छा लगेगा अगर आप नीचे कमेंट में अपनी कुछ यादें हमारे साथ शेयर करेंगे। कैसे अब दीवाली पहले से अलग है? खैर फिलहाल हम आपको ले चल रहे हैं पुणे की दीवाली का एक सुंदर नजारा दिखाने।

हर मोड़ पर एक सवाल बार-बार मेरे दिमाग में आता है- हमारे पिता और दादा के जमान में जब नया-नया स्कूटर आया होगा, तो लोगों में कैसे फीलिंग रही होगी और आज वो टीवीएस वीगो के बारे में क्या सोचते होंगे?

क्या सीट स्टोरेज, टेलिस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन, चमकती हुई हेडलाइट, ट्यूबरहित टायर उन्हें पसंद आयेंगे? पार्किंग ब्रेक जो ढलान में आपकी मदद करते हैं- यानी अब नो बैले डांस, जो हमारे पिता करते थे, जब स्कूटर ढलान पर होती थी। ड्राईव स्पार्क टीम के पिताओं की ओर से हम कहना चाहेंगे हां जरूर!

पिछले दिनों को भुलाना आसान है। आज के जमाने की स्कूटर में एक ही चीज दिखती है। वो यह कि कैसे टीवीएस जैसी कंपनियां लोगों की सुविधाओं का खास खयाल रखते हुए अपने मानकों पर खरी उतर रही हैं।

दीवाली पर पुणे हमारी पहली पसंद बना क्योंकि चमकते हुए इस शहर का एक बेहतरीन इतिहास भी है और यह भारत के प्राचीन शहरों में से एक है। माना जाता है कि यहां का सबसे पुराना इलाका पेठ 5वीं सदी में स्थापित किया गया था। शहर का नाम संस्कृति शब्द पुण्य नगरी से पड़ा है।
दीवाली पर इस पुण्य नगरी में वीगो ने क्या कमाल किया, चलिये जानते हैं...

पुणे का ठंडा मौसम हमें बेंगलुरु की याद दिला रहा था। हम शहर में निकल पड़े। पहली नजर मां लक्ष्मी की मूर्तियों पर पड़ी। एक से एक आकर्षक मूर्तियों के साथ लोग मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियों में थे।

दीवाली पर चारों तरफ रौशनी में नहाई इमारतें यह बता रही थीं कि भगवान राम अपनी पत्नी सीता के साथ आज ही के दिन वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। यह माना जाता है कि दुनिया में 80 करोड़ लोग दीवाली मनाते हैं।

टीवीएस वीगो के साथ ऐसी सुबह मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। हम पुणे की यात्रा की शुरुआत यहां के सबसे प्रतिसद्ध मंदिर कसबा गणपति मंदिर से की। यह मंदिर कसबा पेट में स्थित है, जो एक पुराना इलाका है। इसे पुणे का दिल भी कहा जाता है।

कसबा गणपति को नमन करने के बाद हमने बाजारों की ओर रुख किया। हमारा मानना है कि रिटेल थैरेपी भी आजमानी चाहिये, वो भी जब वीगो आपके संग हो तो जरूर।

दीवाली की शॉपिंग के लिये मशहूर लक्ष्मी रोड और तुलसी बाग हमारी सूची में था। यहां पहुंचे तो देखा उत्साह से भरे परिवार दीवाली के लिये खरीददारी में जुटे हुए हैं। हर किसी के अंदर एक उमंग सी दिखाई दे रही थी।

पुणे के युवाओं के लिये वीगो से बेहतर कोई स्कूटर नहीं। वैसे भी वीगो चलाने वालों की यहां कमी नहीं। ट्रेंडी लुक वाली वीगो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आसानी से चली जाती है। और जब हॉन्ग-कॉन्ग लेन जैसी सड़क हो तो तो क्या बात है।

जी हां हॉन्ग-कॉन्ग लेन- जो पुणे में विदेशी सामानों की बिक्री के लिये प्रसिद्ध है। ठीक बेंगलुरु के नेशनल मार्केट की तरह।

शॉपिंग का लुत्फ उठाने के बाद हमने शहर के अन्य इलाकों की ओर वापसी की और कयानी बेकरी पहुंचे। यहां के प्रसिद्ध श्रेसबरी बिस्कुट खाये। यह बेकरी 1950 से पुणे की शान बनी हुई है। यहां बेकरी आइटम के लिये लोगों की लंबी लाइन लगती है।

वीगो को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिसने दीवाली की भीड़ के बीच हमारी यात्रा को आसान बनाया। कई और खाने-पीने की चीजों का लुत्फ उठाने के बाद हम पुणे की सीक्रेट जगहों की ओर चल दिये। वो भी पुणे की पहाड़ियों पर।

वीगो ने पहाड़ियों पर टेढ़े-मेढ़े रास्तों को भी आसान बना दिया। और देखते ही देखते हम पारवती हिल मंदिर पहुंच गये। यहां भी लोगों की भारी भीड़ जमा थी। हमें बताया गया कि इस पहाड़ी से पूरा शहर दिखाई देता है। फिर क्या था हमने कैमरा निकाला और शहर के आकर्षण को कैमरे में कैद कर लिया। दीवाली की रात जगमगाता हुआ पुणे यहां सो ऐसा दिखाई दे रहा था, जैसे तारे जमीन पर हों।

जिस वक्त हम पारवती मंदिर में थे, वो धनतेरस की रात थी। अब पुण्ो में और क्या-क्या है- हमारा जवाब था ऐतिहासिक इमारतें, दीवाली का उत्साह और बहुत कुछ...

हमें लगा कि हमने सब कुछ देख लिया। लेकिन वास्तव में तो अभी असली दीवाली तो बाकी थी। वो हम देखेंगे अपने अगले पड़ाव में.... तब तक के लिये बने रहिये हमारे साथ।

TVS #WeGo के संग कोलकाता की सैर का मजा - भाग 1
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