TVS #Wego से रात-दिन कोलकाता की सैर — भाग 2
दिन भर की हलचल के साथ उत्साह से भरी पूरे दिन की यात्रा के साथ हम भी कोलकाता की हवा में रम गये। अब तक हमें समझ आ गया था कि कोलकाता की सड़कों पर कैसे चलना है
वेलकम बैक!
दिन भर की हलचल के साथ उत्साह से भरी पूरे दिन की यात्रा के साथ हम भी कोलकाता की हवा में रम गये। अब तक हमें समझ आ गया था कि कोलकाता की सड़कों पर कैसे चलना है। हमें अपनी गलतियां भी महसूस होने लगी थीं। खैर असल में तो कोलकाता की असली लाइफ तो रात को शुरू होती है, और इस बात का अहसास हमें तब हुआ, जब सूरज ढल गया।
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हम वाईएमसीए पहुंच चुके थे, तभी मेरे साथी ने कहा, कहीं हम कुछ मिस तो नहीं कर रहे? काले आसमान की ओर देख मैं ने कहा, "हां मुझे भी लग रहा है। और वो है यहां की नाइट लाइफ।" हमने तुरंत वाईएमसीए के केयरटेकर स्वपन से संपर्क किया। एक छोटी सी पूछताछ पर पता चला कि यहां के पंडालों में देर रात तक भीड़ जमी रहती है। बस फिर क्या था, हमने हवा से बात करने वाली टीवीएस वीगो फिर से उठाई और निकल पड़े।

एक समय आता है, जब लाइफ आपको दूसरा मौका देती है, जो है 'कल'। लेकिन हम तबतक इंतजार नहीं कर सकते थे। अब आप सोच रहे होंगे, कि क्या रात को हमने एन्ज्वॉय किया? क्या वीगो के साथ यह सैर कुछ अलग थी? या फिर क्या वाकई में कोलकाता की नाइट लाइफ एकदम अलग है?

सड़क पर निकलते ही हमें चकाचौंध रौशनी में डूबे पंडाल दिखाई दिये। हवा में गूंजता हुआ संगीत और ढोल नगाड़े एक अलग ही रस भर रहे थे। ऊपर से बारिश की फुहारें। अब आप सोच रहे होंगे कि बारिश ने सारा मजा किरकिरा कर दिया? जबकि सच कुछ और ही है।
दुर्गा पूजा के दौरान कोई भी बारिश या तूफान बंगालियों के उत्साह को ठंडा नहीं कर सकता। ठंडी हवाओं के बीच गीली सड़कों पर हम टीवीएस वीगो पर सवार होकर घूम रहे थे। गीली सड़क पर भी इसके पहियों की ग्रिप बरकरार थी। मौसम बेहद सुहावना हो चुका था।

सकरी गलियों से होते हुए हम उस पंडाल में पहुंचे, जो हमारी लिस्ट में नहीं था। यह था चोरेबागान सरबोजिनिन पंडाल, राम मंदिर के पास- यह पंडाल अनोखे रंगों को बिखेर रहा था। पंडाल की सजावट बेहद आकर्षक थी।

30 मिनट के फोटो सेशन के बद हम वापस वीगो-इंग पर निकल पड़े। जी हां फिर से सकरी गलियों से होते हुए कोलकाता की मुख्य सड़कों पर।

चाहे पतली गलियां हों, या फोर लेन की सड़क। जहां पंडाल है, वहां उत्साह है। दुर्गा पूजा के विभिन्न रंगों के बीच हमारी वीगो भी अपने ही आकर्षक रंग दिखा रही थी।

कभी-कभी आप अपने दिन की शुरुआत रंगों से करना पसंद करते हैं। हम सभी जानते हैं कि कार, मोटरसाइकिल या स्कूटर को चुनते वक्त रंग सबसे महत्वपूर्ण फैक्टअर होता है। वीगो में खास यह है कि इसमें ऊर्जा से भरे कई सारे रंग है। जिस रंग को हमने चुना वो है वीगो वॉलकैनो रेड।

वीगो नीले रंग में भी बहुत आकर्षक लगती है। जहां तक निजी तौर पर मुझे गहरा स्काई ब्लू रंग पसंद है।

एक रात से दूसरी रात तक हमारा सफर जारी रहा। हम उत्साह में पूरी तरह बंध चुके थे।

बात अगर मां दुर्गा की हो, तो बंगालियों की आस्था पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। इतनी गहरी आस्था आपको कहीं नहीं देखने को मिलेगी। कोलकाता में दुर्गा पूजा एक महोत्सव के रूप में दिखती है। यह किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग भूमिका में इस पूजा का हिस्सा बनते हैं।

मा दुर्गा की एक राक्षस भैंसे महिशासुर पर विजय के पर्व के रूप में हम दुर्गा पूजा मनाते हैं।
यह पर्व बंगालियों और हिंदुओं के लिये कितना महत्वपूर्ण है, यह जानना है तो आप इस मौके पर कोलकाता जरूर जाइये। जो कि हमने किया यहां की यादें अविस्मरणीय हैं।
इस दौरान तरह-तरह के व्यंजनों का भी स्वाद चखने को मिलता है।

कई बार तेज रफ्तार से भागतीं पीली टैक्सियों का पीछा करने के बाद हमने पुचकावाला के स्टॉल पर चटपटे पुचका का लुत्फ उठाया। अगर आपको मीठा पसंद है, तो यहां के मिष्टी दोई (मीठे दही) को जरूर चखियेगा।

हर अंधेरी रात के बाद उजाले से भरा दिन होता है। पुचका जैसी तमाम चीजों से हम एनर्जी प्राप्त करते हैं। और हमार यात्रा जारी रही।

वीगो पर सवार होकर तीन पंडालों की शानदार यात्रा हमें हमेशा याद रहेगी। यह वो यात्रा थी, जिसकी हमने कोई योजना नहीं बनायी थी, हमें कुछ नहीं पता था, हम कहां जा रहे हैं। बस चलते चले गये और रास्ते में मां दुर्गा के दर्शन होते रहे।

अगर अच्छे माइलेज की बात करें, तो वीगो सबसे बेहतरीन स्कूटर है। कोलकाता की भीड़ से भरी सड़कों पर भी इसका माइलेज बेहतरीन रहा। इसके टैंक की क्षमता 5 लीटर है, जिसे फुल करने के बाद आप 250 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं।

दुर्गा पूजा के अंतिम दिन जब मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा था, तब हमने मां दुर्गा को हमारे ऊपर आशीष बनाये रखने के लिये धन्यवाद दिया। साथ ही धन्यवाद दिया टीवीएस वीगो को, जिसने हमारी इस यात्रा को सफल बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस यात्रा के बारे में बताने में जहां हमारे शब्द फीके पड़े, वहां तस्वीर बोली।

तस्वीरें, जिनमें जगमगाते पंडाल दिख रहे हैं।

श्रद्धालु पूजा-अर्चना में लीन हैं। और मां दुर्गा का मूर्ति विसर्जन एक अलग सी भावनात्मक हलचल पैदा कर रहा था।

विसर्जन के वक्त मां दुर्गा जितनी शांत दिखीं, वो अविस्मरणीय था।

अब एक बात उन लोगों के लिये जो दुर्गा पूजा के वक्त कोलकाता की सैर करना चाहते हैं-
सड़कें भीड़ से भरी मिलेंगी, कई किलोमीटर तक पंडालों की लाइनें लगी होंगी। इसलिये यदि आप पैदल नहीं चल सकते हैं, तो किसी और दिन अपनी यात्रा को प्लान कीजिये, क्योंकि दुर्गा पूजा के उत्साह के बीच कोलकाता की सैर बेहद कठिन होती है।
हमारे साथ बने रहिये। #WeGo के संग हमारा अगला पड़ाव है पुणे, जहां हम दीवाली मनायेंगे।


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