शांति, प्रेम और खुशियों से भरे कोचिन की सैर टीवीएस वीगो पर
क्रिसमस के मौके पर कोच्चि की शानदार सैर टीवीएस वीगो के संग। यह एक यादगार सफर है, जिसमें पूरे शहर की संस्कृति सिमट कर समा गई।
कोच्चि में एक दिन बिताने के बाद हमने यहां के ऐतिहासिक स्थलों को घूमने की योजना बनायी। पिछले दिन धूप का लुत्फ उठाने के बाद हम सभी हिप्पोस ने फैसला किया कि ये समय पूरी तरह से क्रिसमस की मस्ती में डूब जाने का क्योंकि इससे अच्छा मौका भगवान के बनाए इस देश में दोबारा नहीं मिलेगा-#WegoCochin।

इसलिए हमारी लिस्ट में पहला नाम दुनिया के सबसे चर्चित सेंट जार्ज सायरो-मालाबार कैथलिक फोरेेन गिरजाघर था, जो कि भारत के पुराने ऐतिहासिक चर्च में से एक है, जिसका निर्माण 594 ईसा में हुआ था।

चर्च जाते वक्त, हम कोच्चि-मुजिरिस बिन्नाले एग्जिबिशन पर रुके। यहां पर शहर की कला को प्रदर्शित किया जाता है। रास्ते में रास्ता काफी खराब था, लेकिन इस सुगम यात्रा के लिये सिंगल सिलेंडर इंजन वाली वीगो को धन्यवाद देना चाहूंगा।

हमारा पहला गंतव्य था सेंट फ्रांसिस चर्च, जहां हमें काफी कुछ नया जानने को मिला। यह भारत में सबसे पुरानी यूरोपियन चर्च है। वास्कोडिगामा को भी यहीं दफनाया गया था। हालांकि उनकी लाश को दफनाने के चौदह वर्ष बाद वापस पुर्तगाल ले जाया गया था। अब उनकी कब्र बेलेम, लिसबन में है।

फिर हमारी जरूरत थी खाना, आखिर हम केरल के सी-फूड को कैसे मिस कर सकते हैं। इस फूड के स्वाद को दोहरा स्वादिष्ट बनाया कोचिन कार्निवाल ने, आपको बता दें कि ये कार्निवाल हर साल के अंत में शुरू होता है, जिसकी तैयारी एक महीने पहले से होती है।

इस कार्निवाल की शुरूआत तब हुई थी जब पुर्तगालों का पूरा नियंत्रण कोस्टल एरिया पर हो गया था। इस दौरान बच्चे से लेकर बूढ़े तक सफेद कपड़ों में नजर आते हैं और काफी मजे करते हैं और खेल खेलते हैं।

कार्निवल में आमतौर पर एक सार्वजनिक समारोह या परेड शामिल होता है जिसमें सर्कस के तत्त्व, मुखौटे और सार्वजनिक खुली पार्टियां की जाती हैं।
इस कार्निवाल का मुख्य आकर्षण ड्रम और संगीत होता है जिसपर हाथी की तस्वीरें अलंकृत होती हैं।

यही वो मौका था, जब वीगो ने अपनी क्षमता को सिद्ध किया। आसानी से हैंडल की जा सकतने वाली इस स्कूटर की बेहतरीन बॉडी बैलेंस तकनीक, सिंह ब्रेक सिस्टम के चलते हमारी यात्रा का मजा दुगना हो गया। हमने रास्ते में खूब मस्ती की। और हां चार्जिंग पोर्ट के जरिये हम अपना फोन चार्ज कर पा रहे थे, जिसकी वजह से रास्ते में फोटो खींचते वक्त एक भी सुनहरा पल छूटा नहीं।

कोचिन में करीब-करीब आधा दिन बिताने के बाद, यह समय था लजीज भोजन तक पहुंचने का। क्यों न हो, पेटपूजा जो करनी थी। यहां आज का लंच सबसे खास इसलिये था, क्योंकि हम थे समुद्र के किनारे और हमने चुना यहां का प्रसिद्ध सीगुल रेस्तरां को।

रेस्तरां में जिस जगह पर हम बैठे, वहां से ठीक सामने अरब सागर दिखाई दे रहा था। प्रवेश द्वार पर हमने जब वीगो को पार्क किया, तो मुझे वो समय याद आ गया, जब कभी लोग पुराने स्कूटर यहीं पर खड़ा करते थे। वीगो को देख समझ आता है कि समय पूरी तरह बदल गया है।

यह वो मौका था जब वीगो बाहर निकली- मॉडर्न टेलिस्कोपिक फोर्क, फुली डिजिटल इंस्ट्रूमेंट कंसोल, अंडर सीट स्टोरेज और आसान इलेक्ट्रिक स्टार्ट बटन यात्रा को आसान बनाते हैं। यह स्कूटर वाकई में अत्याधुनिक तकनीकियों से लैस है, यह आपको तभी महसूस होगा, जब आप इसकी सवारी करेंगे।

इसमें कोई शक नहीं, कि क्रिसमस के सैंटा भी वीगो की सवारी करना चाहेंगे। इसकी डिजाइन हर किसी के दिल और दिमाग पर छा जाती है। अब समय आ गया था आगे बढ़ने का।

रौशनी से नहाये हुए चर्च, जहां प्रार्थनाओं का दौर जारी था, ड्राइव स्पार्क की टीम समेत हजारों परिवार वहां मौजूद थे। अब समय आ गया था कोच्चि के किले को छोड़ने का। अब तक कोच्चि की एक बेहतरीन छाप हमारे दिल पर पड़ चुकी थी। और हम बहुत खुश थे, क्योंकि हमारी एक और यात्रा #WegoCochin सफल हुई।

अब आगे क्या है? क्या यही समाप्ति है? बेशक नहीं। हम यहां से बहुत जल्द बेंगलुरु पहुंचेंगे, जहां हम #WegoBangalore के संग मनायेंगे नये साल का जश्न।

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