पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए अनिवार्य हो गया है पीयूसी प्रमाणपत्र
हम अक्सर पेट्रोल पम्प जाकर "नियंत्रण के तहत प्रदूषण" सर्टिफिकेट प्राप्त कर लेते है। आजकल इस सर्टिफिकेट की वैल्यू काफी कम हो गई है और अब यह सिर्फ एक फार्मेलिटी हो गई है। इसे वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया था।
लेकिन दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि अब सिर्फ उन्ही वाहनों को डीजल या पेट्रोल प्रदान किया जाएगा जिनके पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट होगा। सरकारी अधिकारियों को भरोसा है कि ऐसा करने से उन्हे वाहनों की जांच करने में मदद मिलेगी।

एस.के. श्रीवास्तव, मुख्य सचिव ने एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया है। इस बैठक में सभी अधिकारियों ने मिलकर निर्णय लिया है कि किस प्रकार वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाएं। उन लोगों ने प्रदूषण नियंत्रित करने के तरीके और साधनों पर चर्चा की और वैध पीयूसी प्रमाणपत्र के साथ लोगों के लिए ईधन उपलब्ध कराने का फैसला लिया।
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विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश को स्वीकार कर लिया है और यह जल्दी ही प्रदूषण की जांच की पहल की शुरूआत कर देगा। हालांकि, इसे शुरू करने के बाद पूरी तरह लागू करने में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन टीम का मानना है कि इसे पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिये।

पूरे देश में पीयूसी स्टेशनों को बहुतायत में बनाया जाएगा और इसकी बहुत ज्यादा लागत नहीं होगी। इसमें लगी हुई मशीन वाहन के मालिकों को बता देगी कि उनका वाहन कितना प्रदूषण, वातावरण में फैला देता है। इसके हिसाब से वाहन के मालिक अपने वाहन की सर्विस करवा सकते हैं या उसका कोई निदान कर सकते हैं।
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इससे पहले समिति ने वाहनों को उपयोग करने वाले लोगों को हतोत्साहित करने के लिए भारी पार्किंग चार्ज लगाने का निर्णय लिया था। उन्हे लगा, इससे सड़कों पर भीड़ कम होगी, लोग वाहनों को कम चलाएंगे और प्रदूषण कम फैलेगा।


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