2014 के बाद क्या होगा 'हीरो' और 'हॉन्डा' का

कंपनी के चेयरमैन व संस्थापक ब्रिज मोहन लाल मुंजाल व उनके वरिष्ठ अधिकारियों को इस सवाल का जवाब अभी से खोजना होगा। तीन साल बाद जब कंपनी से अधूरे नाम के साथ वहन निकलेगा तब उसकी बिक्री पर क्या असर हो सकता है? क्या कंपनी के उत्पादों में लोगों की रुचि बढ़ेगी या घटेगी। हर प्रकार के नकारात्मक असर के लिए कंपनी को तैयार रहना होगा।
दो दिन पहले हीरो और हॉन्डा का करार खत्म हो गया और दोनों कंपनियों ने अपने नाम अलग कर लिए। हम आपको बता दें कि नाम अलग होने से जापानी कंपनी हॉन्डा से कहीं ज्यादा असर भारतीय कंपनी हीरो को पड़ेगा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह कि हीरो के नाम से साइकिलें भी आती हैं। जबकि हॉन्डा ने अलग से कई उत्पाद लॉन्च कर पहले ही भारत में अपनी पैठ जमा ली है।
ऐसे में सामान्य व्यक्ति की मानसिकता हीरो की मोटर साइकिल खरीदने से इंकार कर सकती है। हां अगर मोटरसाइकिलों का नाम हीरो स्प्लेंडर, हीरो पैशन, हीरो सीटी100 हुआ, तो शायद कंपनी की बिक्री पर थोड़ा कम असर पड़े, लेकिन यह बात तय है कि चार साल बाद दोनों नाम अलग होने के बाद कंपनी को भारी नुकसान हो सकता है।


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