देश की सबसे खतरनाक सड़क: हर पल दांव पर लगती है जिंदगी
एक समय देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने कहा था कि, 'सड़कें भारत की भाग्य रेखा हैं, इनका मजबूत होना ही विकास की निशानी है' उनकी ये बात पूर्णतय: सत्य हैं। किसी भी मुल्क के लिये वहां का इन्फ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना बहुत माइने रखता है।
लेकिन विकास वो धूप है जो अपने पिछे विनाश की परछाई भी लेकर चलती है। देश में जहां एक तरफ शानदार सड़कों की जाल बिछ रही हैं वहीं सरे राह मौत का दस्तरखान भी बिछ रहा है। हमारा ताल्लूख आये दिन होने वाले सड़क हादसों से है।
हाल ही में देश की बेहतरीन सड़कों की फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ा 'यमुना एक्सप्रेसवे', दो बड़े शहरों को जोड़ने वाली इस एक्सप्रेसवे पर राइडिंग का अपना एक अलग ही आनंद है। लेकिन अब ये सड़क कोई आम सड़क नहीं रह गई है जी हां, रोजाना 2 लोगों की जान लेने वाली 165 किलोमीटर लंबी ये सड़क नोएडा से आगरा तक जाती है।
आइये तस्वीरों के माध्मय से आपको बताते हैं कि हमने इसे देश की सबसे खतरनाक सड़क क्यों कहा।

आगे नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें और तस्वीरों में देखें यमुना एक्सप्रेसवे पे कैसा होता है मौत का खेल।

आपको बता दें कि, यमुना एक्सप्रेसवे कुल 165 किलोमीटर लंबी है जो नोएडा को आगरा से सीधे जोड़ती है। ये हाइवे जितना लोगों को सहुलियत दे रहा है उतना ही मौत का कारण भी बन रहा है।

हाल ही में एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ है कि, बीते 3 वर्षो में अब तक इस हाइवे पर कुल 319 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हो चुकी है।

इसके अलावा अगस्त 2012 से लेकर अप्रैल 2015 के बीच में इस हाइवे पर कुल 2,194 सड़क हादसे हुये हैं। यानी की औसतन हर रोज इस हाइवे पर 2 हादसे होते हैं।

आगरा के रहने वाले और पेशे से वकील एएन श्रिवास्तव ने आरटीआई फाइल की थी। यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण ने ये आंकड़े आरटीआई में जारी किये हैं।

पिछले साल इस एक्सप्रेसवे पर कुल 771 एक्सीडेंट हुये थें, वहीं इस साल महज 4 महिनों में ही 252 सड़क हादसे दर्ज किये जा चुके हैं। इस एक्सप्रेसवे को बनाते समय इसकी क्वालिटी को पूरी तरह से ध्यान में रखा गया था। लेकिन इस सड़क पर ऐसा मौत का खेल होगा किसी ने नहीं सोचा था। तो आखिर इसके पिछे कारण क्या है?

जानकारों की माने तो यमुना एक्सप्रेसवे हादसे का मुख्य कारण है ओवरस्पीडि़ंग, और ये सत्य भी है। इस हाइवे पर वाहन चलाने की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तय की गई है। लेकिन आप यहां बड़े ही आसानी से 150 से 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ते वाहन देख सकते हैं।

खुली और चौड़ी सड़क मिलते ही चालक हिरन बन जाते हैं। ओवरस्पिड़ींक के साथ ही 'ड्रिंक एंड ड्राइव' यानी की शराब पीकर वाहन चलाना भी हादसे एक मुख्य कारण है। बड़े वाहन जैसे ट्रक आदि के साथ होने वाले एक्सीडेंट के ज्यादातर मामलों में चालक को नशे की हालत में पाया गया है।

ये वही यमुना एक्सप्रेसवे है जहां हाल ही में एक जेट विमान को उतारा गया। इसकी गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर सकता है लेकिन यदि इस हाइवे पर दौड़ने वाले लोग खुद नियमों को ताख पर रखना बंद नहीं करेंगे तो ये मौत का खेल रूकेगा नहीं।


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