एयरलैंडर 10 : सामने आया दुनिया का यह सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट, लगातार 3 हफ्ते आसमान में रह सकता है !
दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट की नई फोटोज जारी की गई हैं। 'एयरलैंडर 10' नाम के इस एयरक्राफ्ट की कुछ दिन बाद ही पहली टेस्ट फ्लाइट की जाएगी। ब्रिटेन की 'हाइब्रिड एयर व्हीकल्स' कंपनी ने इसका डिजाइन तैयार किया है। हवा में ऊपर उठने के लिए इसमें हीलियम का इस्तेमाल किया जाएगा और यह लगातार तीन हफ्तों तक हवा में रह सकेगा। इसे रिमोट से भी कंट्रोल किया जा सकेगा। इसकी मैक्सिमम स्पीड 148 किलोमीटर/घंटा होगी।

दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट अप्रैल की शुरुआत में ब्रिटेन में अपनी पहले टेस्टिंग फ्लाइट पर रवाना होगा। इस एयरक्राफ्ट को बनाने वाली कंपनी बेडफर्डशर की कंपनी हाईब्रिड एयर व्हीकल्स ने इस एयरक्राफ्ट की तस्स्वीरें जारी कर दी हैं।

पहली यूके टेस्ट फ्लाइट से पहले दुनिया के सबसे लंबे 20,000 किग्रा वजन के एयरक्राफ्ट 'एयरलैंडर 10' की स्लाइड्स में जानें क्या हैं इसकी खूबियां... (Photo Source : Guardian)

एयरलैंडर 10 की लंबाई 302 फीट है। जो कि दुनिया के अब तक के सबसे लंबे यात्री जेट से भी 60 फीट लंबा है। इसका डिजाइन ब्रिटिश कंपनी हाइब्रिड एयर वीइकल्स (एचएवी) ने किया है। यह हवा में 3 हफ्ते तक रह सकता है और 148 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ा भर सकता है। (Photo Source : Guardian)

एयरलैंडर 10 को बनाने में 187 करोड़ रुपए की लागत आई है। खास बात यह है कि गोलियों से छेद होने की स्थिति में भी यह विमान आसानी से उड़ान भर सकता है। (Photo Source : Guardian)

इसकी खासियत
- एयरलैंडर 10 92 मीटर लंबा है, 44 मीटर चौड़ा और 26 मीटर ऊंचा है।
- पैसेंजर जेट के मुकाबले इसकी लंबाई लगभग 15 मीटर ज्यादा है।
- यह लोगों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले ले जा सकेगा।
- पैसेंजर जेट के अलावा यह एक एयरशिप की भी तरह काम कर सकेगा।
- यह हवा से हल्की हीलियम गैस के सहारे उड़ेगा। यह एक हेलीकॉप्टर भी है, क्योंकि इसे रन-वे की जरूरत नहीं होगी।
- हाइब्रिड एयर व्हीकल्स (एचएवी) ने इसे इस तरह से डिजायन किया है।
- हीलियम के प्रयोग से तीन हफ्ते तक हवा में रह सकता है। एयरलैंडर10, 92 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ भी सकता है।

फिलहाल एयरलैंडर 10 प्रथम विश्व युद्ध की विमानशाला में रखा है और सोमवार (21 मार्च) को इसका आधिकारिक तौर पर अनावरण किया जाएगा। इसका पहला टेस्ट कुछ हफ्तों बाद होगा।

पहले यूएस आर्मी के लिए बन रहा था एयरलैंडर
2009 में इसे यूएस आर्मी के सर्विलांस प्रोजेक्ट के तहत डेवलप किया गया था। हालांकि, 2012 में इसे बनाने के काम बीच में ही रोक दिया गया था।

इसका इस्तेमाल सर्विलांस, कम्युनिकेशन, कार्गो और सिविलियन ट्रैवल के लिए किया जाएगा। इसमें एक बार में 48 पैसेंजर्स ट्रैवल कर सकेंगे।

यह पानी और बर्फ समेत कई तरह के सर्फेस पर लैंड कर सकता है।

इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि यह बिना शोर और पॉल्युशन किए एयर ट्रैवल कर सकेगा। कंपनी के मुताबिक, 2018 तक वे 12 एयरलैंडर बनाएंगे।



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