स्वीडन में शुरू हुआ दुनिया का पहला इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग रोड - जानिए इसकी खूबियां
स्वीडन में दुनिया के पहले इलेक्ट्रिफाइड रोड की सेवा चालू कर दी गई है। इस रोड पर बीचों-बीच दो रेल लाइन बिछाई गईं हैं जिनके सहारे कार या अन्य किसी इलेक्ट्रिक वाहन को ड्राइव के दौरान ही चार्ज किया जा सकता है।

दरअसल सरकार ने एक सर्वे में पाया कि लगभग 70 प्रतिशत प्रदुषण वाहनों के कारण हो रहा है। इसलिए सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और प्रदुषण कम करने की दृष्टि से ऐसा कर रही है।

हालांकि अभि यह रोड मात्र दो किलोमीटर का है लेकिन आनेवाले समय में सरकार इस प्रोजेक्ट को और बढ़ाने वाली है।

वैसे भी दूनिया धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलीटी की तरफ आगे बढ़ रही है, जिसमें स्वीडन एक कदम आगे दिखता है। आइये जानते हैं इस रोड से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।

यह रोड स्वीडन के स्टॉकहोल्म अरलांडा एयरपोर्ट के पास स्थित है। फिलहाल इसकी लंबाई मात्र 2 किलोमीटर है पर निश्चित ही इसे और बढ़ाया जाएगा।

स्टॉकहोल्म अरलांडा एयरपोर्ट और पोस्टनॉर्ड (पास ही में स्थित लॉजिस्टीक सेंटर) के बीच स्थित यह 2 किलोमीटर का रोड 50 मीटर के सेक्शन में बंटा हुआ है।

इस इलेक्ट्रिफाइड रोड की खास बात ये है कि कार या अन्य इलेक्ट्रिक वाहन इसपर तभी चार्च होंगे जब ट्रैक पर कार मूव करेगी। यदि कार रूक जाती है तो चार्जिंग भी अपने आप थम जाएगी।

गौर करने वाली बात ये है कि स्वीडन सरकार लोगों को ये सुविधा मुफ्त में नहीं देने जा रही है। एनर्जी कंशप्शन के हिसाब से लोगों से चार्ज वसुला जाएगा। लेकिन फिरभी यह चार्ज अन्य रोडसाइड चार्जिंग स्टेशन से सस्ते ही होंगे।

यह पूरा प्रोजेक्ट ई-रोड अरलांडा ग्रुप द्वारा बनाया गया है। इसके चीफ अधिकारी हंस ने कहा की यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास में काफी मददगार होगा और साथ ही यह हाईब्रिड कारों के लिए भी कारगर साबित होगा।

हंस ने आगे कहा कि " यदि हमने इस तरह के मात्र 20,000 किलोमीटर रोड बना लिए तो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वह पर्याप्त होगा। हाइवे और रोड के बीच की अधीकतम दूरी 45 किलोमीटर से अधिक नहीं होती और इतना तो इलेक्ट्रिक कार एक बार के रिचार्ज पर चल ही सकती हैं। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि 5,500 किलोमीटर सड़क भी इलेक्ट्रिफाई करना पर्याप्त होगा। "

हंस ने ये भी कहा कि " इसमें ट्रैक के सतह पर कोई बिजली नहीं होती है। इसके पांच या छह सेंटीमीटर नीचे बिजली है। हमने इस पर कई प्रयोग किए हैं। हमने देखा कि यदि नमक के पानी को भी इस सड़क पर पूरा उड़ेल दिया जाए तो भी सतह पर बिजली का स्तर सिर्फ एक वोल्ट रहता है। आप इस पर नंगे पैर चल सकते हैं। "

इस तरह के 1 किलोमीटर के रोड बनाने में 1 मिलीयन यूरो की लागत आती है फिर भी यह एक पारंपरिक ट्राम लाइन से 50 गुना सस्ता है। इसलिए लागत की हिसाब से ये हाइवे के लिए एक आदर्श प्रोजेक्ट है।

ये प्रोजेक्ट दिखाता है कि दुनिया किस गंभीरता से इलेक्ट्रिक मोबिलीटी की तरफ आगे बढ़ रही है। हालांकि भारत में इस तरह का कोई बड़ा प्रोजेक्ट फिलहाल देखने को नहीं मिलता।


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