वाहन दुर्घटना पर ब्रेक लगाने की गांरटी देता है ऐंटी-लॉक ब्रेक सिस्टम (एबीएस)
ऐंटी-लॉक ब्रेक सिस्टम (एबीएस) किसी भी वाहन दुर्घटना को रोकने की गांरटी देता है, बशर्ते वह सही समय पर लगाया गया हो। आइए इस रिपोर्ट में एबीएस से जुड़ी सारी बातें विस्तार से जानते हैं।
ऐंटी-लॉक ब्रेक सिस्टम यानि एबीएस के बारे में कुछ भी जानने के पहले तो आप यह जान लीजिए कि साल 2019 तक देश के सभी वाहनों में एबीएस फीचर्स को अनिवार्य कर दिया जाएगा और यह पूष्टि ट्रांसपोर्ट एवं हाइवे मिनिस्ट्री की ओर से चार महीने पहले ही कर दी गई है।

यही नहीं मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, अप्रैल 2018 से लॉन्च होने वाले हर नए मॉडल में ABS अनिवार्य रूप से शामिल होगा। ABS के अलावा, अक्टूबर 2017 से नए मॉडल की कारों में एयरबैग देना भी जरूरी हो जाएगा, वहीं अक्टूबर 2019 से पुराने या मौजूदा मॉडल की हर नई कार में एयरबैग देना जरूरी होगा।

आपको बता दें कि ऐंटी-लॉक ब्रेक सिस्टम (एबीएस) गाड़ी का ऐसा फीचर है, जिससे बीते सालों में सड़क हादसों की संख्या काफी हद तक घटी है। क्योंकि वाहनों में लगाया जाने वाला यह सिस्टम एक सुरक्षा व्यवस्था है जो मोटर वाहन पर पहियों को सड़क की सतह के साथ व्यवहारिक रूप से चलने की अनुमति देता है।

अचानक ब्रेक लगाने पर ABS फीचर पहियों को लॉक नहीं होने देता है। इस वजह से ड्राइवर कार पर नियंत्रण नहीं खोता है और कार बिना फिसले और असंतुलित हुए दिशा बदल लेती है और रुक जाती है। यही बात एबीएस से लैस बाइक के साथ भी होती है।

लेकिन दुर्भाग्य की बात यह कि हमारी ऑटो इंडस्ट्री वाहनों को सस्ता रखने की होड़ में इस फीचर को गंभीरता से नहीं लेते हैं और अपने वाहनों में इसका इस्तेमाल कम करते हैं। जबकि रिसर्च में भी कई बार यह साबित हो चुका है कि ABS फीचर हादसों की संभावनाओं को 20 फीसदी तक कम करता है।

एक सर्वे के मुताबिक, हर साल हमारे देश में करीब 1.5 लाख लोगों की जान सड़क सड़क हादसों में चली जाती हैं। इन हादसों के पीछे कुछ हिस्सों की सड़कें खराब होना, ड्राइविंग स्किल्स की कमी होना और वाहनों के सेफ्टी फीचर्स का अपग्रेड न होना बड़ा कारण है। अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में ज्यादातर लोगों ने संतुलन खो दिया और दुनिया को अलविदा कह गए।

दूसरी ओर सरकार और पुलिस भी सेफ ड्राइविंग के लिये समय समय पर जागरूक करती रहती है, लेकिन कई लोग हैं जो इसे मानने को तैयार ही नहीं होते। हालांकि अब सरकार ने इसे आगे अनिवार्य कर दिया है तो जाहिर सी बात है इस समस्या का समाधान आगे चलकर निकल सकेगा।

अब यहां थोड़ा सा पीछे जाकर कुछ जरूरी बातों पर नजर डालें तो आश्चर्यजनकरुप से पता चलता है कि भारत में बिकने वाली टॉप-10 कारों में 50 फीसदी से ज्यादा कारें ऐसी है जिनमें ABS नहीं है। इनमें इंट्री लेवल की हैचबैक सेगमेंट की लोकप्रिय कारें जैसे मारुति सुजुकी अल्टो 800, रेनॉ क्विड और हुंडई इयॉन शामिल हैं, इनमें ABS फीचर नहीं है।

हालांकि, पैसेंजर सेफ्टी के प्रति बढ़ती गंभीरता को देखते हुए ज्यादातर कंपनियों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हैचबैक कारों मसलन मारुति सुजुकी बलेनो और इग्निस में ये फीचर दिए गए हैं। अभी 10 अगस्त को लॉन्च हुई सुजुकी गिक्सर एसएफ बाइक को पहली बार एबीएस के साथ पेश किया है।

एबीएस का सबसे बड़ा फायदा यह है के आप चाहे जितनी भी स्पीड में हो और तभी अगर अचानक के आपको पूरे ब्रेक एकदम से दबाने पड़ जाये तो आपकी मोटरसाइकिल या कार कभी स्किट नही करेगी और आम ब्रेक से कुछ मीटर पहली रूक जाएगी, बारिश के समय जब रोड गीली हो जाती है तब भी यह उठी ही कारगर साबित होती है।

इसका अर्थ है कि ना तो तेज़ स्पीड में आपका वाहन स्किट करेगा, न गिरेगा और आम ब्रेकिंग सिस्टम के मुकाबले पहले रूक भी जाएगी। जबकि आम ब्रेकिंग सिस्टम में तेज़ स्पीड में ब्रेक दबाने पर आपका वाहन गिर फिसल सकता है और आप गिरकर चोट खा सकते हैं।

इसलिए देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारत सरकार काफी सक्रियता से काम रही है। यही वजह कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे ने अप्रैल 2019 से सभी तरह की कारों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) फीचर अनिवार्य रूप से देने के निर्देश दिए हैं।

इसके बाद जिस सेफ्टी फीचर पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाना है, वह है सेफ्टी एयरबैग्स। कहा जा रहा है कि साल 2017 के बाद बनने वालीं सभी कारों में एयरबैग्स अनिवार्य रूप से दिए जाएंगे। इसी के साथ ही मौजूद मॉडल्स को साल 2019 तक एयरबैग्स से लैस करने की भी योजना है।

बात एयरबैग की शुरू हुई है तो आपको बताते चलें कि जब कभी आपकी गाड़ी किसी चीज से टकराती है तो सेंसर एक्टिव हो जाता है और एयरबैग को खुलने की कमांड देता है। कमांड मिलते ही एक सेकंड से भी कम समय में एयरबैग खुल जाता है। कमांड मिलते ही स्टेयरिंग के नीचे मौजूद इंफ्लेटर एक्टिव हो जाता है।

यह इंफ्लेटर सोडियम ऑक्साइड के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस पैदा करता है, जो एयरबैग में भर जाती है और वह फूल जाता है। ऐसे में टक्कर लगने की स्थिति में आप एयरबैग से टकराते हैं और इसकी वजह से आपकी जान बच जाती है।

Drivespark की राय
कुल मिलाकर यहां पर एबीएस या एयरबैग के बारे में बताने का अर्थ है कि आप अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त और सावधान हों। अगर आप वाहन खरीदनें की सोच रहे हैं तो थोड़ा पैसा भले ज्यादा लग जाए लेकिन वाहन वहीं खरीदें जो एबीएस से लैस है।


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