स्टेशन वैगन कारें भारत में क्यों हुईं फेल? जानें 5 कारण

भारत में हैचबैक से लेकर एसयूवी कारों तक कई मॉडल्स काफी पॉपुलर हैं। हालांकि कुछ ऐसी कार मॉडलें भी हैं जो भारतीय ग्राहकों को कभी पसंद नहीं आई और बुरी तरह फेल हो गईं। आज हम बात करने वाले हैं स्टेशन वैगन कारों के बारे में जिनका ज्यादातर इस्तेमाल स्टेशन में पैसेंजर टैक्सी के रूप में किया जाता था। ये कारें विदेशों में तो काफी पॉपुलर हुईं लेकिन भारतीय ग्राहकों ने इन्हें कभी पसंद नहीं किया। आइये जानते हैं भारत में ये कारें क्यों फेल हुईं...

स्टेशन वैगन कारें भारत में क्यों हुईं फेल? जानें 5 कारण

साधारण कारों की तुलना में अधिक कीमत

स्टेशन वैगन कारें आमतौर पर सेडान का एक्सटेंडेड डिजाइन होती हैं। इनमें अधिक सवारी के लिए पीछे अतरिक्त सीटें दी जाती हैं जिससे पीछे से इनका साइज बड़ा दिखता है। हालांकि, अतरिक्त सीटों के कारण इनकी कीमत एक सेडान की तुलना में अधिक होती है। टाटा एस्टेट और स्कोडा ऑक्टाविया कॉम्बी असल में स्टेशन वैगन कारें थीं जिन्हें अधिक सवारी बैठाने के लिए डिजाइन किया गया था। ये कारें अपने स्टैंडर्ड मॉडल की तुलना में 40 फीसदी अधिक महंगी थीं, इस वजह से ये ज्यादा संख्या में नहीं बिकीं।

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स्टेशन वैगन की मांग में कमी

भारत में स्टेशन वैगन कारों की मांग कभी भी अच्छी नहीं रही। बाजार में हैचबैक और एसयूवी कारों के बेहतर डिजाइन और फीचर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया और लोगों ने अपनी फैमिली कार के रूप में इन्हें अपनाया। हालांकि, स्टेशन वैगन कारें अपने बड़े साइज और सीमित उपयोग के कारण लोगों को ज्यादा पसंद नहीं आई और एक खास टूरिस्ट सेगमेंट तक ही सीमित रह गई।

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डिजाइन के कारण भी हुईं फेल

चूंकि वैगन सेडान कारें भारतीय बाजार में पूरी तरह नई थीं, इनका अजीब सा दिखने वाला डिजाइन लोगों को पसंद नहीं आया। वैगन सेडान कारें 7-सीटर होती थीं लेकिन इनका डिजाइन एक 7-सीटर एसयूवी से बिलकुल अलग था। कई लोगों का मानना था कि ये न तो पूरी तरह सेडान है और न ही एसयूवी हैं। इससे ग्राहकों के मन में इनके डिजाइन को लेकर कई उलझनें पैदा हो गई थीं।

स्टेशन वैगन कारें भारत में क्यों हुईं फेल? जानें 5 कारण

कम सीटिंग स्पेस

हालांकि, वैगन जैसी दिखने वाली स्टेशन सेडान कारें केबिन में सेडान से ज्यादा जगह देती थीं, लेकिन स्पेस के मामले में ये 7-सीटर एसयूवी के सामने कहीं नहीं टिकती थीं। कई ग्राहकों का मानना था कि इनकी तीसरी पंक्ति की सीटों में बेहद कम जगह थी, जहां दो व्यस्क लोगों का बैठना काफी मुश्किल था।

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एसयूवी से टक्कर

बाजार में लगातार आ रही नई कारों से स्टेशन वैगन कारों को कड़ी टक्कर मिलती रही। हालांकि, एसयूवी कारों ने स्टेशन वैगन कारों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। एसयूवी कारों में मिलने वाले बेहतर फीचर्स, ज्यादा स्पेस और बेहतर राइड कम्फर्ट के सामने स्टेशन वैगन कारें फीकी पड़ गईं। इसके अलावा, कमर्शियल उपयोग के लिए भी एसयूवी कार्यों को ज्यादा इस्तेमाल होने लगा, जिससे स्टेशन वैगन कारों की सेल बिलकुल खत्म हो गई।

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Hindi
English summary
Why station wagon cars failed in india know reasons
Story first published: Tuesday, April 26, 2022, 6:15 [IST]
 
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