उड़ान के दौरान एयरोप्लेन का तापमान क्यों हो जाता है कम? जानिए क्या है वजह
एयरोप्लेन में सफर करने वालों को ये पता होगा कि प्लेन जब आसमान में होता है तो इसके अंदर का तापमान बहुत ज्यादा कम हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

प्लेन के अंदर का तापमान इतना कम हो जाता है कि बहुत से लोगों को कई कपड़े पहनने पड़ते है। तो चलिए आज हम आपको बताते है कि आखिर एयरोप्लेन में तापमान इतना कम क्यों हो जाता है।

असल बात तो ये है कि प्लेन के अंदर का तापमान सामान्यतः 22 से 24 डिग्री सेल्सियस तक रखा जाता है। कभी-कभी यह तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है। ये उतना ही तापमान है जितना एसी चलाने पर आपके ऑफिस का होता है।

फिर भी आपको इतने तापमान पर बहुत ज्यादा ठंड लगती है। तो सवाल ये उठता है कि आखिर प्लेन में सामान्य तापमान पर भी ज्यादा ठंड क्यों लगती है। दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एयरोप्लेन में आप एक ही सीट पर बैठे रहते हैं।

जीहां, जब आप ऑफिस में होते है तो आपका शरीर सक्रिय रहता है और खुद ही गर्माहट पैदा करता है, लेकिन एयरोप्लेन में आप एक सीट पर बैठे रहते है और इसलिए आपका शरीर गर्माहट पैदा नहीं कर पाता है।

लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि उस स्थिति में एयरोप्लेन का पैसेंजर केबिन पर्याप्त गर्म हो जाता है, जब केबिन में बहुत सारे यात्री मौजूद होते है। इसका कारण ये है कि उनके शरीर से निकली गर्माहट से एयरोप्लेन के अंदर पर्याप्त गर्मी आ जाती है।

इसके अलावा एयरोप्लेन के तापमान और दबाव के बीच भी गहरा संबंध होता है। आपको बता दें कि इस संबंध के चलते कभी-कभी यात्रियों में बेहोशी छाने लगती है। इस विशेष स्थिति को हाईपॉक्सिया कहते है।

इसकी वजह यह होती है कि जमीन पर आपके शरीर और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है, लेकिन प्लेन में उच्च दबाव के चलते आपके शरीर और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और यह सही से काम नहीं करता है।

हालांकि तापमान की बात करें तो यह हर इंसान को अलग-अलग महसूस हो सकता है, उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को सामान्य तापमान में ठंड नहीं लगती है, तो वहीं दूसरे व्यक्ति को ज्यादा ठंड लगती है। जिसके चलते एयरोप्लेन में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अंदर का तापमान थोड़ा कम ही रखा जाता है।


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